असम: सीजेपी ने पहली बार भाजपा शासित राज्य के स्कूल की तारीफ की; आशुतोष रांका बोले- मामा, ऐसे और स्कूल बनाइए
असम के सरकारी स्कूल पर सीजेपी की सकारात्मक टिप्पणी, साथ ही सुधार की मांग
Indianewslive247.com – असम - सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर विभिन्न राज्यों में अभियान चला रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने असम के एक सरकारी स्कूल की सराहना की है। संगठन के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा साझा किए गए वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्कूल में दिख रही सुविधाएं उत्साहजनक हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की गुणवत्ता केवल चुनिंदा परिसरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और राज्य के अन्य स्कूलों की दशा में भी सुधार जरूरी है।
रांका ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के वीडियो को साझा करते हुए लिखा:
“यह अच्छा स्कूल है मामा। ऐसे और बनाइए।”
उनकी टिप्पणी को सीजेपी के अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संगठन पिछले कुछ समय से सरकारी स्कूलों की स्थिति, बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं के मुद्दे पर लगातार आवाज उठा रहा है। रांका ने अच्छी व्यवस्था वाले स्कूल की प्रशंसा के साथ दिसपुर और रामपुर के उन विद्यालयों का भी उल्लेख किया, जिनका उन्होंने दौरा किया था। उनके अनुसार, इन दोनों स्थानों पर स्कूलों की हालत बहुत खराब मिली थी और वहां तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
वीडियो में दिखीं आधुनिक सुविधाएं
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 29 सितंबर 2026 को असम के एक सरकारी स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो में स्कूल भवन, कंप्यूटर लैब तथा कई आधुनिक सुविधाएं नजर आईं। पोस्ट के साथ मुख्यमंत्री ने सरकारी और निजी स्कूलों की तुलना करते हुए संदेश दिया था कि सरकारी स्कूल भी बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध करा सकते हैं।
रांका ने उसी वीडियो को आधार बनाकर कहा कि यदि ऐसी सुविधाएं तैयार की जा सकती हैं, तो इन्हें राज्य के अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उनका जोर केवल भवनों की सुंदरता पर नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री भी इस उद्देश्य से सहमत होंगे।
सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब, पर्याप्त कक्षाएं, स्वच्छ परिसर और सीखने के अनुकूल संसाधन विद्यार्थियों के अनुभव पर सीधा असर डालते हैं। लेकिन किसी एक स्कूल में अच्छी सुविधा होने के बावजूद व्यापक तस्वीर तभी बदलेगी, जब दूरदराज और कमजोर स्थिति वाले विद्यालयों को भी समान प्राथमिकता मिले। रांका की प्रतिक्रिया इसी अंतर की ओर संकेत करती है।
दिसपुर और रामपुर के स्कूलों को लेकर उठाया सवाल
असम के जिस आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल की तारीफ की गई, उसके समान स्तर का ढांचा राज्य के हर हिस्से में उपलब्ध हो, यह सीजेपी की मांग का मुख्य बिंदु है। रांका ने कहा कि उन्होंने दिसपुर और रामपुर में जिन स्कूलों का दौरा किया, वहां स्थिति चिंताजनक थी। उन्होंने इन विद्यालयों की दशा सुधारने की अपील मुख्यमंत्री से की।
उनका कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता को क्षेत्र, सामाजिक स्थिति या किसी विद्यालय की अलग पहचान के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। बच्चों के लिए सुरक्षित भवन, बुनियादी सुविधाएं और पढ़ाई का उचित वातावरण कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी हैं।
ऐसे मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि स्कूलों से जुड़ी समस्याएं अक्सर स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक बनी रहती हैं। किसी भवन की मरम्मत, कक्षाओं की उपलब्धता, तकनीकी संसाधन या अन्य जरूरतों पर काम तभी तेज हो सकता है, जब प्रशासनिक स्तर पर स्थिति की पहचान और प्राथमिकता दोनों स्पष्ट हों।
हिरासत की घटना के बाद आई प्रतिक्रिया
रांका की यह टिप्पणी उस घटना के कुछ दिन बाद सामने आई है, जब उन्हें और सीजेपी के 40 से अधिक कार्यकर्ताओं को असम में पुलिस हिरासत में लिया गया था। रविवार को गुवाहाटी में संगठन की एक बैठक से पहले रांका और अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया था।
रिहा होने के बाद रांका ने आरोप लगाया था कि असम पुलिस ने उन्हें और उनकी टीम को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखा। उनका दावा था कि पुलिसकर्मियों ने हिरासत का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया और केवल इतना कहा कि उन्हें ऊपर से निर्देश मिले हैं। इन आरोपों पर पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
हिरासत से पहले रांका ने मुख्यमंत्री पर यह आरोप भी लगाया था कि वह सीजेपी द्वारा सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने से असहज हैं। उन्होंने कहा था कि संगठन शिक्षा के अलावा काजीरंगा क्षेत्र में जमीन, जंगल और पानी से जुड़े मुद्दों पर भी बात करेगा। ये रांका के आरोप हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बयान पर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा:
“हिमंता बिस्वा डर गया 😂”
आलोचना के साथ उपलब्धि को स्वीकार करने का संदेश
रांका की ताजा पोस्ट का एक अलग राजनीतिक और सामाजिक अर्थ भी है। उन्होंने मुख्यमंत्री की नीतियों या सरकार की समग्र व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उस स्कूल की उपलब्धि को खारिज नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अच्छी सुविधा वाले सरकारी स्कूल को स्वीकार किया और मांग रखी कि ऐसे मॉडल को अधिक व्यापक बनाया जाए।
यह रुख सार्वजनिक शिक्षा पर होने वाली बहस को केवल आरोप-प्रत्यारोप से आगे ले जा सकता है। जब किसी स्कूल में बेहतर व्यवस्था दिखाई देती है, तो उससे दूसरे क्षेत्रों के लिए एक अपेक्षा तैयार होती है। अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए सवाल यही रहता है कि जिस स्तर की सुविधा एक स्थान पर संभव है, वह अन्य विद्यालयों तक कब पहुंचेगी।
सीजेपी ने इससे पहले राजस्थान में भी सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया था। संगठन ने रामपुरा के एक सरकारी स्कूल के पुनर्निर्माण के बाद इसे विद्यार्थियों की जीत बताया था। असम में भी संगठन का अभियान विद्यालयों की स्थिति को सार्वजनिक बहस के केंद्र में रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
असम के इस प्रकरण में एक ओर आधुनिक सुविधाओं से युक्त सरकारी स्कूल की तस्वीर है, तो दूसरी ओर उन परिसरों का सवाल है जिनके बारे में सुधार की मांग की जा रही है। रांका की पोस्ट का सार यही है कि अच्छी पहल की प्रशंसा की जानी चाहिए, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की सफलता का मानक तभी पूरा होगा जब हर बच्चे को समान गुणवत्ता वाला अवसर मिल सके।
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