World Organ Donation Day: अंगदान में दिल्ली-एनसीआर राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे, सामाजिक आंदोलन का आह्वान
दिल्ली-एनसीआर में अंगदान की दर राष्ट्रीय औसत से कम, सामाजिक आंदोलन की जरूरत
Indianewslive247.com – महादान के रूप में जाने जाने वाले अंगदान की स्थिति दिल्ली-एनसीआर में राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। मृत्यु के बाद अंगदान से होने वाले प्रत्यारोपण की हिस्सेदारी इस क्षेत्र में मात्र तीन प्रतिशत है, जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा 17.5 से 18 प्रतिशत के बीच है। इस कमी के कारण जरूरतमंद रोगियों को सही अंग मिलने में लंबा समय लग रहा है।
प्रतीक्षा सूची में बढ़ती भीड़
विश्व अंगदान दिवस से पहले बुधवार को ओखला के एक निजी अस्पताल में आयोजित 'गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ' कार्यक्रम में एनओटीटीओ के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि देश में अंग प्रत्यारोपण की मांग और उपलब्धता के बीच गहरा अंतर बना हुआ है। वर्तमान में 1,05,560 रोगी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में दर्ज हैं। इनमें से 73,646 किडनी और 23,396 लीवर प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। हर 20 मिनट में एक नया रोगी इस सूची में शामिल हो रहा है।
देश में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
किडनी प्रत्यारोपण में सबसे ज्यादा मांग
हर वर्ष दो लाख से अधिक नए रोगी किडनी प्रत्यारोपण की श्रेणी में आते हैं, लेकिन केवल 14 हजार प्रत्यारोपण ही संभव हो पाते हैं। लीवर और हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों की संख्या भी वार्षिक रूप से लगभग 50 हजार है। पिछले वर्ष करीब 5,100 लीवर और 239 हृदय प्रत्यारोपण संपन्न हुए।
एक दान से आठ जीवन बच सकते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों के साथ-साथ समाज और परिवारों को भी अंगदान के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अंगदान करके आठ लोगों की जीवन रक्षा कर सकता है। किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े, आंत और पैंक्रियाज के अलावा कॉर्निया, त्वचा और हड्डी जैसे ऊतक भी दान किए जा सकते हैं।
पिछले दशक में प्रत्यारोपणों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2013 में करीब 4,900 अंग प्रत्यारोपण हुए थे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 20,138 से अधिक हो गई। इसके बावजूद जरूरत की तुलना में उपलब्ध अंग कम ही हैं। 'जुग-जुग' अभियान के माध्यम से लोगों को अंगदान का संकल्प लेने और जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
प्रतीक्षा में 2,805 रोगियों की मृत्यु
वर्ष 2020 से 2024 के बीच 2,805 रोगियों की मृत्यु अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हुए हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, अंगों की उपलब्धता बढ़ाना प्रत्यारोपण व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।
दधीचि देहदान समिति का आह्वान
विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर दधीचि देहदान समिति ने डिफेंस एन्कलेव में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी और समिति के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट आलोक कुमार ने अंगदान को महादान बताते हुए सामाजिक आंदोलन बनाने पर जोर दिया।
भारतीय संस्कृति में दधीचि ऋषि के त्याग से प्रेरणा लेकर देहदान और अंगदान की भावना को घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है। एक अंगदाता कई लोगों को जीवन देने का माध्यम बन सकता है।
हर्ष मल्होत्रा ने लोगों से अंगदान का संकल्प पत्र भरने और अपनी इच्छा परिवार को बताने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिल्ली भाजपा और दधीचि देहदान संस्था का हर परिवार में अंगदान पर चर्चा कराने का संकल्प है ताकि लोगों के मन में दान का भाव जागे।
एडवोकेट आलोक कुमार ने कहा कि दधीचि ऋषि के त्याग की परंपरा हमें जीवन के बाद भी समाज के लिए योगदान करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि समिति का लक्ष्य है कि हर घर में अंगदान की चर्चा हो और लोग भ्रम व भय से बाहर निकलकर जीवन बचाने के इस अभियान से जुड़ें।
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