UP: जून में 10% अधिभार वसूली मामले में आयोग का बड़ा फैसला, बोला- 14 माह से हो रही गलत वसूली, आगे न करें
UP में जून के 10% अधिभार वसूली मामले में आयोग के बड़े फैसले के अपडेट
UP - उत्तर प्रदेश (UP) में ईंधन अधिभार की वसूली में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ गया है। नियामक आयोग ने अप्रैल 2025 से जून 2026 के दौरान लगाए गए 10% अधिभार के लेखा विवाद के मामले में निर्णय लिया है। आयोग ने घोषणा की है कि भविष्य में इस विशेष फार्मूले के आधार पर अधिभार वसूली नहीं की जाएगी। इस निर्णय से उपभोक्ताओं के लेखा खातों में अतिरिक्त बurdens लगाने के विवादों पर रोक लगाई गई है।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग में याचिका दाखिल की
उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग में याचिका दाखिल कर जून माह में गलत तरीके से अधिभार वसूली का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान आयोग ने पावर कार्पोरेशन से सभी गणना दस्तावेज लेने के निर्देश दिए थे। अप्रैल 2025 से जून 2026 तक की गई एफपीपीसीए गणना में त्रुटियां पाई गईं। कार्पोरेशन ने स्पष्ट किया था कि विशेष नियमों के आधार पर अधिभार निर्धारित किया जा रहा है।
मंगलवार को आयोग की द्विसदस्यीय पीठ ने मामले का अंतिम निर्णय सुनाया। फैसला देते हुए आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं के लेखा खातों में अब तक वसूली की गई रकम गलत ढंग से निर्धारित की गई है। आदेश में केंद्रित किया गया है कि भविष्य में अधिभार की गणना केवल विद्युत क्रय लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर होगी। अन्य माह की देनदारी या समायोजन को अधिभार में शामिल नहीं किया जा सकेगा।
आयोग ने उपभोक्ताओं के लेखा खाते में गलत वसूली को रोकने के लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन भविष्य में इस तरह की गलतियों को दोहराने नहीं चाहिए। कानून की सीमा के भीतर ही कार्य करें।
अधिभार वसूली के विवाद की पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश में ईंधन अधिभार की वसूली के विवाद की शुरुआत अप्रैल 2025 से हो गई। इस दौरान कार्पोरेशन ने एक विशेष फार्मूला का उपयोग कर अधिभार निर्धारित किया था। इस प्रक्रिया में उपभोक्ताओं के लेखा खातों में 14 माह से अतिरिक्त रकम वसूली की गई। आयोग ने इस विवाद के मामले में गहरी जांच कर एक नया निर्णय लिया है।
अधिभार के विवाद की गहरी जांच के बाद आयोग ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि पावर कॉरपोरेशन ने उपभोक्ता परिषद के विरोध के बावजूद गलत ढंग से अधिभार वसूली की। यह विवाद एक वर्ष से लंबित रहा था। आयोग के फैसले के बाद उपभोक्ता परिषद ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।
हालांकि, निर्धारित रूप से गलत तरीके से वसूली की गई रकम को उपभोक्ताओं के लेखा खातों में कैसे वापस किया जाएगा, इसके बारे में अब तक कोई विस्तारित निर्देश नहीं जारी किया गया है। आयोग के फैसले के बाद उपभोक्ता परिषद की ओर से अधिकारियों के साथ अतिरिक्त संवाद चल रहा है। इस विवाद के निर्णय से उत्तर प्रदेश के ल