IndiaNewsLive247
Fast mobile article powered by Nexiamath-SEO AMP.
AMP Article

MPPSC मेंस 2025: हाईकोर्ट ने रोक हटाई, अभ्यर्थियों को मिली राहत, अगली सुनवाई 17 जुलाई को

Published जून 19, 2026 · Updated जून 19, 2026 · By Daniel Davis

मप्र हाईकोर्ट ने मपीपीसी मेंस 2025 के आयोजन की अनुमति दे दी

MPPSC म स 2025 - मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 के मुख्य चरण के आयोजन के रास्ता खोल दिया। न्यायालय ने गुरुवार को रोक आदेश खत्म कर दिया, जिसके चलते अभ्यर्थियों को राहत मिली।

25 मार्च से लागू अंतरिम रोक आदेश को हटाने के लिए याचिकाकर्ताओं ने अर्ज किया था। उनके आग्रह के बाद युगलपीठ ने निर्णय लिया कि अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाए।

रोक के कारणों का विचार अभी जारी

हाईकोर्ट ने पहले रोक आदेश लगाया था, जिसके पीछे आधार बने थे वर्गवार कट ऑफ अंक नहीं जारी करने, आरक्षित वर्ग के अच्छे अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों पर चयन नहीं किए जाने तथा आयु सीमा के संबंध में छूट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं। रोक के दौरान इन मुद्दों पर दो सुनवाई हुई थी, जिसमें 25 मार्च और 2 अप्रैल 2025 के बीच मुख्य परीक्षा के आयोजन को रोक लगा दिया गया था।

मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाई जाए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित नहीं हो।

17 जुलाई को अगली सुनवाई होगी, जिसके लिए मामला युगलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। लेकिन देर शाम तक सुनवाई होने में असमर्थ रही। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अनुरोध किया कि अंतरिम आदेश को समाप्त कर दिया जाए और शेष कानूनी मुद्दों पर अलग से सुनवाई की जाए। युगलपीठ ने अनुरोध को स्वीकार करते हुए लोक सेवा आयोग को परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी।

चुनौती दिए गए मुद्दों में आरक्षण, मेरिट और माइग्रेशन से जुड़े विषय अभी भी विचाराधीन हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह व पुष्पेद्र कुमार शाह ने पक्ष रखा, जबकि पीएससी के लिए अधिवक्ता पराग तिवारी खड़े हुए।