MP: महाकाल मंदिर में फिर टूटा दान का रिकॉर्ड, इस वर्ष समिति को मिले 144 करोड़ रुपये; जानें कहां से कितने आए?
मध्य प्रदेश: महाकाल मंदिर दान रिकॉर्ड टूटे, 144 करोड़ रुपये की आय के बाद छू गए
MP - मध्य प्रदेश में महाकाल मंदिर के दान प्राप्ति में एक नए उच्च स्तर को छू गए हैं। मंदिर समिति के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में आय लगभग 144 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसमें 62 करोड़ रुपये दान पेटियों से, 5 करोड़ 50 लाख रुपये नगद काउंटर से, 1 लाख 23 हजार रुपये मनीऑर्डर से, 3 करोड़ 60 लाख रुपये ऑनलाइन क्यूआर कोड से, 3 करोड़ 38 लाख रुपये अन्नक्षेत्र से और 4 करोड़ 65 लाख रुपये गुप्त दान के रूप में शामिल हैं। इसके अलावा, लड्डू प्रसादी की बिक्री से मंदिर को 65 करोड़ रुपये की आय मिली।
मंदिर के दान प्राप्ति में तेजी आई
महाकाल मंदिर के आय में वृद्धि उसके लोक बनने के बाद देखी जा सकती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दान का आंकड़ा पहले के मुकाबले दोगुना हो गया। 2019-20 में आय के आंकड़े 15.04 करोड़ रुपये थे, जो कोरोना महामारी के कारण 2020-21 में 9.46 करोड़ रुपये तक घटकर रह गई। वर्ष 2021-22 में 19.97 करोड़, 2022-23 में 38.91 करोड़, 2023-24 में 59.91 करोड़ और 2024-25 में 117 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई।
दान प्राप्ति की गिनती में फुल-प्रूफ सिस्टम
मंदिर के दान के आंकड़े अब एक अच्छी व्यवस्था के बाद बेहतर रूप से संग्रहित हो रहे हैं। सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के अनुसार, मंदिर में दान पेटियों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है। ये पेटियां हर सप्ताह सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष में लाई जाती हैं। इसके दौरान निरीक्षकों और अधिकारियों की मौजूदगी बरकरार रखी जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो गई है।
सावधानी के लिए, दान की गणना करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले या सिली हुई जेब वाले कपड़े पहनकर ही प्रवेश दिया जाता है। इस तरह के प्रावधानों ने आंकड़ों की शुद्धता को सुनिश्चित किया है।
मंदिर के विस्तार और बजट में बढ़ोतरी
महाकाल मंदिर के क्षेत्रफल में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसका क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर से बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर में 306 कर्मचारी कार्यरत हैं, जो सुरक्षा, सफाई, रखरखाव, अन्नक्षेत्र, गोशाला, वैदिक शोध संस्थान �