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MP: आज हाईकोर्ट में सुनवाई जारी, जानिए 27% OBC आरक्षण विवाद क्या है और अभ्यर्थियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

Published जुलाई 16, 2026 · Updated जुलाई 16, 2026 · By Elizabeth Smith

MP: हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण विवाद जारी, अभ्यर्थियों पर असर

MP - मध्य प्रदेश (MP) में ओबीसी आरक्षण विवाद फिर से हाईकोर्ट में चल रहा है, जिसकी सुनवाई गुरुवार को जबलपुर में शुरू हुई। यह मामला न केवल कानूनी चुनौतियों के कारण उठा है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और हजारों रिक्त पदों के निर्धारण पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। इस मुद्दे के निर्णय तक पहुंचे नहीं हैं, जिससे अब तक आरक्षण वितरण में अस्थाई कानूनी रोक लगी हुई है।

ओबीसी आरक्षण के प्रस्ताव का इतिहास

मार्च 2019 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण की दर लगभग 14% से बढ़ाकर 27% कर दी गई थी। इस निर्णय के पीछे का कारण राज्य में ओबीसी वर्ग के लगभग 48% जनसंख्या और उनके प्रतिनिधित्व के बढ़ा जाने की मांग रही थी। इस अप्रैल 2019 के फैसले के बाद मध्य प्रदेश में कुल आरक्षण घटकर 63% रह गया।

अंतरिम आदेश के बाद उच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए 1992 के इंद्रा साहनी फैसले में 50% की आरक्षण सीमा लागू रही। इसलिए, ओबीसी आरक्षण में बढ़ोतरी के बाद मध्य प्रदेश में आरक्षण वितरण के संदर्भ में कई विवाद उठे, जिससे अभ्यर्थियों के परिणाम अटक गए।

हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम आदेश और प्रभाव

2020 में उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण के पूर्ण क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि 50% से अधिक आरक्षण के लिए मध्य प्रदेश सरकार को अंतिम निर्णय आने तक नियुक्तियां रोक दी जाए। इस आदेश के कारण कई भर्तियां अटैक कर गईं।

बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू कर दी, जिसमें कुल पदों के 87% पर नियुक्तियां जारी रहीं, जबकि शेष 13% पद अदालत के अंतिम फैसले तक रोक दिए गए। इस तरह के विवाद के परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश में आरक्षण की रूपरेखा पर पुनर्विचार करने की मांग बनी रही।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और मुख्य बिंदु

2024-25 के दौरान मध्य प्रदेश आरक्षण विवाद पर 70 से ज्यादा याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई। इन याचिकाओं में कहा गया कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के लिए विधायी निर्देश आवश्यक है। 22 मार्च 2025 को न्यायाधीशों ने अंतरिम आदेश दिया कि सभी मामलों की सुनवाई अलग-अलग रूप से होगी।

7 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित कानून पर प्रथम दृष्टया कोई रोक नहीं है।

इस आदेश के बाद 22 अप्रैल 2025 को 52 याचिकाएं मध्य प्रदेश के मामले को आगे ले जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आमंत्रित की गईं। अब उच्च न्यायालय ही मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण विवाद के अंतिम निर्णय लेगा।

सरकार और राजनीतिक दलों की एकजुटता

मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल