Kanpur-Lucknow Expressway: लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात हुआ ये एक्सप्रेसवे, कल फिर 10 जगह धंसी सड़क
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद फिर हुई सड़क धंसने की घटना
Indianewslive247.com – असोहा और अचलगंज इलाके में रविवार की बारिश ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क को फिर से प्रभावित कर दिया। इस बार दस अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की सूचना मिली। मुख्य कारण पानी की निकासी में कमी और एक स्थान पर नाली का टूटना रहा। यातायात भी इससे प्रभावित हुआ।
चार हज़ार दो सौ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। हर दिन किसी न किसी जगह सड़क धंस रही है। रविवार को असोहा क्षेत्र में आठ और स्थानों पर सड़क धंस गई।
जलभराव और सड़क धंसने के प्रमुख स्थान
कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली भारी वाहन लेन पर जलभराव दिखाई दिया। किलोमीटर 47.9 से 47.1 तक आठ सौ मीटर, किमी 46.6 से 46.3 तक तूरी के पास और किमी 45.5 पर पूरी सड़क पर बरसाती पानी जमा हुआ। किमी 44.4 से 44.1 तक मेदपुर के पास, किमी 41.3 से 41 तक कुदिकापुर के पास और किमी 42.2 पर कई जगह दबी सड़क पर पानी भरा रहा।
किमी 44.6 और 40.6 पर जलनिकासी नाली टूट गई जिससे पानी भर गया। अचलगंज क्षेत्र में किमी 62 और 63 में भी सड़क धंसी मिली।
मरम्मत कार्य और यातायात व्यवस्था
मरम्मत के काम चल रहे थे इसलिए हल्के वाहनों की दोनों लेन बंद कर दी गईं। कानपुर-लखनऊ लेन पर किलोमीटर 39.7 कांथा और किमी 30.6 बेगमखेड़ा के पास रविवार को युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य किया गया। बीच में बारिश के कारण काम बाधित हुआ था। बारिश थमने के बाद मरम्मत शुरू हुआ। इस दौरान हल्के वाहनों की दोनों लेन बंद कर दी गईं। डायवर्जन लगाकर दोनों लेन का यातायात भारी वाहन लेन से निकाला गया।
ड्रेनेज सिस्टम में खामियां सामने आईं
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से शनिवार को सात मिनट में भी पाँच सौ लीटर पानी नहीं निकल पाया। लखनऊ से आए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने जब ड्रेनेज सिस्टम की जाँच की तो यह तथ्य सामने आया। इसके बाद दीपांकर ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता भी परखी। संतोषजनक कार्य न मिलने पर निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के जिम्मेदारों से नाराजगी जताई।
आलोक दीपांकर एक्सप्रेसवे के किमी संख्या 32.4 (सहरावां गांव) के पास पहुंचे। वहाँ उन्होंने सोख्ता तकनीक से बनी सड़क पटरी में चार वर्ग फीट का गड्ढा खोदवाकर टैंकर से पानी डलवाया और दूसरी तरफ से सड़क के बाहर निकलने का इंतजार किया। करीब सात मिनट इंतजार के बाद भी पानी बाहर नहीं निकला तो एक कर्मचारी को वहीं रोक कर पानी बाहर निकलने का समय नोट करने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने किमी संख्या 30.6 बेगमखेड़ा गांव के पास सड़क खोदकर कराई जा रही मरम्मत कार्य को देखा।
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