Jantar Mantar: सोनम वांगचुक के साथ अनशन पर डटे हैं 30 से अधिक प्रदर्शनकारी, कई राज्यों से पहुंचे हैं लोग
Jantar Mantar: सोनम वांगचुक के साथ अनशन पर डटे हैं 30 से अधिक प्रदर्शनकारी, कई राज्यों से पहुंचे हैं लोग
खाली अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारी सरकार तक मांग लेकर जारी रहेंगे
Jantar Mantar - जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में एक व्यक्ति के साथ अनशन के लिए बैठे हजारों लोग शामिल हैं। इस आंदोलन में प्रमुख नेता सोनम वांगचुक की छवि ज्यादा देखी जाती है, लेकिन प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी की साझा लड़ाई है।
आंदोलन के बारे में बताते हुए प्रदर्शनकारी बताते हैं कि उनकी मांगों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब तक उनका झगड़ा जारी रहेगा। यहां मौजूद लोगों के बारे में कहा गया है कि उनमें छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और नौकरी वाले लोग भी शामिल हैं।
अनशन पर बैठे लोगों में से एक, पुंडी मस्कल बद्रा, ने कहा कि आंदोलन को केवल एक व्यक्ति का नहीं है। जंतर-मंतर पर बैठा हर साथी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है और मांगों के लिए पूरी तरह गंभीर है।
अनशन के कारण कई लोगों को शारीरिक चिंताएं भी बढ़ रही हैं। धर्ना स्थल पर मौजूद सहयोगी लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। कई व्यक्तियों को कमजोरी और अन्य शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
“हम अलग-अलग राज्यों से आए हैं, लेकिन हमारी चिंता और मांग एक ही है। हम चाहते हैं कि हमारी बात सरकार तक पहुंचे और इस मामले का जल्द समाधान निकले।” -रंगला तंवर
“भूख हड़ताल आसान नहीं है, लेकिन अपनी बात मजबूती से रखने के लिए मैंने यह रास्ता चुना है।” -पुंडी मस्कल बद्रा
“लंबे अनशन का असर शरीर पर साफ दिखाई दे रहा है, फिर भी सभी को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी।” -अरीब
“मेरी सिर्फ यही उम्मीद है कि हमारी मांगों को गंभीरता से सुना जाए।” -प्रदर्शनकारी
आंदोलन के 28 दिन पूरे होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों का संकल्प पहले की तरह मजबूत है। वे अपनी मांगों के लिए आगे बढ़ते रहेंगे तक जब तक समाधान निकले।
उनकी प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। प्रदर्शनकारी उज्जवल ने कहा कि आंदोलन के लिए उनका उद्देश्य केवल अपनी बात सरकार तक पहुंचाना और मांगों पर गंभीरता से विचार करना है।
हम्माद ने बताया कि मीडिया में सोनम वांगचुक का चेहरा अधिक दिखाई देता है, लेकिन यहां मौजूद हर व्यक्ति समान प्रतिबद्धता के साथ आंदोलन का हिस्सा है। वे बताते हैं कि 20 जुलाई को संसद मार