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‘ED-CBI नहीं, SIT क्यों?’: राम मंदिर दान चोरी पर अखिलेश का बड़ा दावा, बोले- दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई में दबी जांच

Published जुलाई 6, 2026 · Updated जुलाई 6, 2026 · By Charles Gonzalez

राम मंदिर दान चोरी पर अखिलेश का बड़ा दावा: जांच के नियंत्रण का झगड़ा दिल्ली-लखनऊ में

अखिलेश यादव के आरोप: राजनीतिक विवादों के कारण ED-CBI के बजाय SIT चुनी गई

ED CBI नह SIT क य - उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर दान विवाद पर जांच कार्य के बारे में आरोप लगाते हुए एक महत्वपूर्ण दावा किया है। उन्होंने बताया कि बीजेपी के अंतर्निहित झगड़ों के कारण जांच का नियंत्रण दिल्ली और लखनऊ के दो सत्ता केंद्र के बीच बंट गया। इस विवाद में एजेंसियों के चुनाव का निर्णय बीजेपी के आंतरिक समीकरणों के प्रभाव में हुआ है।

“ईडी, सीबीआई या आयकर विभाग जैसी एजेंसियों के चुनाव का समझौता आप ठीक तरीके से नहीं कर पाए। मैं सत्ता संघर्ष की बात कर रहा था। अगर आप इन एजेंसियों के शामिल होते, तो जांच के प्रभार अलग होता।”

यादव ने कहा कि दान और योगदान चोरों के एक गिरोह के हाथ लग गए हैं। ऐसे लोग लोगों के आक्रोश से डरे हुए हैं और इस वजह से अपनी राजनीतिक रुचि को छोड़ बैठे हैं। उन्होंने इस विवाद की गंभीरता के बारे में भी चेतावनी दी कि अगर विपक्ष के दबाव के कारण जांच का नियंत्रण दिल्ली-लखनऊ के बीच बंट गया, तो यह आगे चलकर लोगों की आस्था को चुनौती देने वाला बन सकता है।

राजनीतिक लड़ाई के बीच जांच का निर्णय: दलों के आरोप और प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस आरोप के जवाब में कहा, "यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन इस देश के लोग और सनातन धर्म के अनुयायी जानते हैं कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस हमेशा राम मंदिर के विरोध करते रहे हैं।" उन्होंने आगे बताया कि इन दलों ने भगवान राम के खिलाफ कई अफवाह फैलाई हैं, जो आगे चलकर उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगी।

अखिलेश यादव के आरोप के बाद, बीजेपी के नेता ने कहा कि जांच कार्य में बीजेपी के आंतरिक विवाद नहीं रुके हुए हैं। विपक्षी दलों के आरोपों के बारे में उन्होंने अधिक विस्तार से कहा कि यह घटना लोगों की आस्था को चुनौती देने के लिए बनाई गई है। बीजेपी के अंतर्निहित झगड़े के बारे में उन्होंने अपनी पक्ष लेते हुए बताया कि SIT का चयन विशेषज्ञता और निष्पादन क्षमता के आधार पर किया गया है।

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