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Delhi Riots: 2020 के दंगों में आईबी अफसर के कत्ल की कहानी, कैसे फंसा ताहिर हुसैन? अंकित की हत्या में छह दोषी

Published जुलाई 14, 2026 · Updated जुलाई 14, 2026 · By Michael Martin

Delhi Riots: AAP ने ताहिर हुसैन को दंगों के दोषी ठहराने पर निलंबित कर दिया

Delhi Riots - दिल्ली दंगों में हुए आईबी अफसर के कत्ल के मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन के खिलाफ दोषी ठहराया। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने उन्हें अपने सदस्यता से निकाल दिया। अदालत ने नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी दोषी घोषित किया, जबकि हसीन उर्फ सलमान, फिरोज, गुलफाम और शोएब आलम को बरी कर दिया। अदालत आगे जमानत के फैसले पर चर्चा करेगी।

हत्या के मामले के आरोप

अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर एफआईआईआर दर्ज किया गया था। दंगों के दौरान अंकित के शरीर पर 51 घात खुलासा हुआ था और उनका शव नाले से बरामद किया गया। मार्च 2023 में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन, हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम के खिलाफ आरोप लगाए गए। नाजिम के खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

दंगों के बाद आम आदमी पार्टी के रुख में बदलाव

2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थकों और मुस्लिम विरोधियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें 53 लोग शहीद हो गए। इस दौरान अंकित शर्मा अपने शत्रुओं के खिलाफ शांति के आग्रह कर रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई।

“2020 के दंगों के दौरान ताहिर हुसैन के खिलाफ एफआईआईआर दर्ज होते ही उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। वर्ष 2023 में दंगा मामलों के आरोपियों के खिलाफ नरम रुख अपनाने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी भी मिली।” - मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा और कपिल मिश्रा

आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को दंगों के मामले में दोषी ठहराए जाने पर संबंध नकार दिए। बताया गया कि उन्हें पांच साल पहले ही पार्टी से निकाल दिया गया था। पार्टी का तर्क था कि ताहिर हुसैन के चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोट बंट गए और इसका फायदा भाजपा के उम्मीदवार को मिला। उन्होंने दंगों में शामिल होने के लिए अपनी सदस्यता से लेना-देना नहीं रह गया।

ताहिर हुसैन 2020 में हुए दंगों में मुस्तफाबाद सीट से एआईएमआईएम के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उनकी हत्या के मामले में छह दोषी ठहराए गए हैं, जिसमें उनका नाम शामिल है। इस फैसले के बाद AAP के अंतर्निहित रहस्य के बारे में चर्चा हो रही है।

दिल्ली दंगों के दौरान पुलिस की मुख्य जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने विश्वसनीय सबूत जुटाने और दोषियों की जांच करने के लिए आगे बढ़े जांच अभियान का उल्लेख किया। वे कहते हैं कि अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून की उचित प्रक्रिया के जरिए सजा दिलाने के लिए प्रयत्न किए गए।