‘370 नहीं हटता तो…’: POK पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा- वहां के लोग हमारे अपने, एक दिन विधानसभा में बैठेंगे
उमर अब्दुल्ला का स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा बयान: पीओके के लोग एक दिन विधानसभा में करेंगे बैठक
अनुच्छेद 370 और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर पर दावा
Indianewslive247.com – बख्शी स्टेडियम में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2019 में कश्मीर को दिया गया विशेष दर्जा समाप्त नहीं किया गया होता, तो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के निवासी भारत के साथ पुनः जुड़ने के लिए सड़कों पर उतरते।
अब्दुल्ला ने पीओके के लोगों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत इन लोगों को अपना मानता है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के प्रतिनिधियों के लिए सीटें पहले से ही सुरक्षित रखी गई हैं। इसका उद्देश्य यह है कि एक दिन ये लोग उन सीटों पर काबिज होंगे।
शहीदों को श्रद्धांजलि और ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि
मुख्यमंत्री ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुल्ला और 1947 में शहीद हुए स्थानीय स्वयंसेवकों को याद किया। उन स्वयंसेवकों ने भारतीय सेना के पहुंचने से पहले सीमा पार से आए हमलावरों का डटकर मुकाबला किया था और अपने प्राणों की आहुति दी थी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "जब मैं सीमा पार और नियंत्रण रेखा के हालात देखता हूं, तो मुझे एहसास होता है कि हमारे पूर्वज जिन्होंने नारा दिया था—'हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार'—वे बिल्कुल सही थे।"
उन्होंने आगे कहा कि आज उन्हें लगता है कि 80 साल पहले हमारे नेताओं ने जो फैसला लिया था, वह एकदम सही था। इस दौरान उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मास्टर अब्दुल अजीज को भी याद किया, जो मुजफ्फराबाद में पाकिस्तानी सेना समर्थित कबाइलियों के आक्रमण को रोकने की कोशिश में शहीद हो गए थे।
संघवाद की रक्षा और संवैधानिक गारंटी की वापसी
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और संघवाद को देश के दो सबसे बड़े स्तंभ बताया। उनका मानना है कि भारत राज्यों का एक संघ है और संघवाद को बचाने व मजबूत करने की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से ही की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हमसे जो कुछ भी छीना गया है वह वापस किया जाना चाहिए, ताकि हमारी पहचान सिर्फ शब्दों में न रहकर व्यवहार में भी दिखे। शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब उनके सपनों को पूरा किया जाएगा, जिसमें राज्य का दर्जा वापस पाना और नई प्रगति की शुरुआत करना शामिल है।
केंद्रीयकरण और परीक्षाओं पर निशाना
शासन के केंद्रीकृत मॉडल पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों की स्वायत्तता को खोखला करती हैं, तो संघवाद को गहरा नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने नीट और जेईई जैसी प्रवेश परीक्षाओं का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि आईआईटी और आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के लिए ऐसी केंद्रीय परीक्षाएं उचित हैं, लेकिन राज्य द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों को अपने स्वयं के दाखिले आयोजित करने का अधिकार बरकरार रखना चाहिए। उन्होंने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों को इसी केंद्रीकृत व्यवस्था की ज्यादती का परिणाम बताया।
पारदर्शी शासन और युवाओं को भरोसा
अपने संबोधन के अंत में, उमर अब्दुल्ला ने जनता को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार पारदर्शी, मेरिट-आधारित भर्ती और जवाबदेह शासन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रशासन की ओर से युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने और उन्हें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का संकल्प लिया।
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