हिमाचल: तीसरे दिन भी बर्फबारी, 10 डिग्री सेल्सियस गिरा पारा; कल्पा में ठंड ने तोड़ा 18 साल का रिकॉर्ड
हिमाचल में तीसरे दिन भी बारिश-बर्फबारी, पारा 10 डिग्री तक गिरा
Indianewslive247.com – ह म चल में लगातार तीसरे दिन बारिश और बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात हुआ, जबकि शिमला, धर्मशाला और अन्य निचले इलाकों में वर्षा जारी रही। कई स्थानों पर तापमान में करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई और कल्पा में ठंड ने 18 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
मौसम के इस बदलाव का असर सड़क संपर्क, सेब तुड़ान, लहसुन की बिजाई और पशुपालकों की आवाजाही पर भी पड़ा है। किन्नौर में बीते तीन दिनों से सेब तुड़ान का काम प्रभावित है, जबकि सिरमौर में बारिश के कारण लहसुन की बिजाई में दिक्कत आई है।
दर्रों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा हिमपात
लाहौल-स्पीति के रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला दर्रों में बर्फबारी हुई। किन्नौर के छितकुल, कुन्नोचारंग, लिप्पा और आसरंग समेत ऊंचे क्षेत्रों में भी बर्फ की परत जम गई। खराब मौसम और फिसलन को देखते हुए दारचा से लेह तथा शिंकुला की ओर दोपहिया वाहनों की आवाजाही एहतियातन रोकी गई है।
चंबा के पांगी और भरमौर क्षेत्र की ऊंची चोटियों पर भी हिमपात दर्ज किया गया। सुराल, परमार, कुमार भुटोरी, चस्क भुटोरी, सुशासर हिल्स और सचे जोत जैसे इलाकों में अधिकतम 10.16 सेंटीमीटर तक बर्फबारी रिकॉर्ड हुई।
किन्नौर में भूस्खलन से एनएच-5 प्रभावित
किन्नौर में बारिश के बाद एनएच-5 पर स्पीलो से पूह और काजा की दिशा में कई जगह भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं हुईं। पूरबनी झूला, नेसंग झूला, मलिंग नाला और श्यासो में मार्ग बाधित रहा। नेसंग क्षेत्र में सड़क बंद होने के कारण हिमाचल पथ परिवहन निगम की एक बस भी फंस गई।
रोहड़ू के जांगलिख में भारी भूस्खलन के बाद सुंदरू खड्ड का प्रवाह रुक गया है। प्रशासन ने लोगों को खड्ड के किनारों से दूर रहने की चेतावनी दी है, क्योंकि पानी का दबाव बढ़ने पर स्थिति जोखिमपूर्ण हो सकती है।
रूपिन पास में फंसे भेड़पालक बचाए गए
शिमला जिले के डोडरा क्वार स्थित रूपिन पास क्षेत्र में शनिवार रात से हिमपात के कारण फंसे सांगला और डोडरा क्वार के भेड़पालकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। 12 सदस्यीय बचाव दल ने अभियान चलाकर उन्हें बाहर निकाला।
हालांकि, करीब 1,500 भेड़-बकरियों का अभी तक पता नहीं चल सका है। अत्यधिक ठंड की वजह से कुछ पशुओं के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। ह म चल के ऊंचे चरागाहों में अचानक मौसम बदलने पर पशुपालकों के लिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
कल्पा में 18 साल का रिकॉर्ड, रात का पारा नीचे आया
बारिश और बर्फबारी के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान गिरा है। रविवार रात ताबो में न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस, कुकुमसेरी में 6.1 डिग्री, केलांग में 7.7 डिग्री, कुफरी में 8.8 डिग्री और शिमला में 12.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कल्पा में ठंड ने 18 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सुबह और शाम के समय ठिठुरन बढ़ने से लोगों ने फिर गर्म कपड़ों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
मंगलवार को बारिश के आसार, 30 सितंबर से मौसम साफ होने की उम्मीद
मंगलवार को प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में वर्षा जारी रहने की संभावना है। इसके बाद 30 सितंबर से 4 अक्तूबर तक मौसम साफ रहने और धूप निकलने का अनुमान है। मौसम खुलने पर सेब तुड़ान, कृषि कार्यों और सामान्य यातायात को राहत मिल सकती है।
सोमवार को कांगड़ा में 90 मिलीमीटर, धर्मशाला में 75 मिलीमीटर, कल्पा में 33 मिलीमीटर, सोलन और मंडी में 23-23 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। शिमला में 22 मिलीमीटर, नाहन में 15 मिलीमीटर और ऊना में 10 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ह म चल में यात्रा करने से पहले क्या सावधानी रखें? पर्वतीय मार्गों पर निकलने से पहले सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लें। बारिश या बर्फबारी के दौरान अनावश्यक यात्रा टालें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वाहन न रोकें।
किसानों और पशुपालकों को क्या करना चाहिए? कटी हुई मक्की, पशु चारा और अन्य फसलों को नमी से बचाकर ढककर रखें। ऊंचे क्षेत्रों में पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने और मौसम की चेतावनियों पर नजर रखने की जरूरत है।
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