IndiaNewsLive247
Fast mobile article powered by Nexiamath-SEO AMP.
AMP Article

‘सफदरजंग में कैद हैं सोनम वांगचुक’: पत्नी बोलीं- हमसे इलाज की आजादी भी छीन ली गई, सरकार पर भरोसा नहीं

Published जुलाई 20, 2026 · Updated जुलाई 20, 2026 · By David Miller

सफदरजंग में कैद हैं सोनम वांगचुक

सफदरज ग म क द ह स - लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने रविवार को केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पति को जंतर-मंतर से बलपूर्वक हटाने के बाद सफदरजंग अस्पताल में अवैध रूप से रखा गया है।

मरीज के इलाज का निर्णय बंधक बना लिया गया

आंग्मो ने कहा कि परिवार को मरीज के इलाज के लिए किस अस्पताल का चयन करेंगे इस बारे में निर्णय लेने का मौलिक अधिकार छीन लिया गया है। उन्होंने बताया कि वे अपने पति को मेदांता या किसी अन्य निजी अस्पताल में शिफ्ट कराना चाहते थे जहां उन्हें सुविधाजनक महसूस हो सके। अस्पताल के अंदर बेहद डरावना माहौल बना रहे हैं, जहां पूरी मंजिल पुलिसकर्मियों से भरी हुई है।

“इस जोधपुर जेल जैसे माहौल में मेरे पति को रखना नहीं चाहतीं।”

ब्लड सैंपल की रिपोर्ट पर तनाव

आंग्मो ने आरोप लगाया कि एक ब्लड सैंपल की रिपोर्ट देने में उन्हें 10 घंटे लगे। पोटेशियम के स्तर में अचानक गिरावट आई, जिसके बारे में एक दिन पहले तक ठीक रिपोर्ट मिली थी। फिर एक बार जांच कराई गई तो यह 3.6 आई, लेकिन सुबह की रिपोर्ट में इसे 2.9 कैसे दिखाया गया? उन्होंने पूछा कि सरकार को स्वास्थ्य की इतनी ही चिंता थी तो क्यों पुलिसकर्मियों के सादे कपड़े भेजकर इतनी बेरहमी से उठाया गया?

तनाव ने ब्लड प्रेशर को बढ़ा दिया

उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने निजी डॉक्टरों को जांच करने दिया नहीं। पुलिस कांस्टेबल निरंतर निगरानी कर रहे हैं और उन्हें फोन का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया। सोनम वांगचुक को उनका टैबलेट भी नहीं दिया गया।

भूख हड़ताल के बारे में स्पष्टीकरण

आंग्मो ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों द्वारा लिक्विड लेने की सलाह के बावजूद उनके पति ने अपनी भूख हड़ताल को जारी रखने का निर्णय लिया। वे अनशन तोड़ने के मूड में नहीं हैं।

फारूक अब्दुल्ला के बयान

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने आंग्मो से मुलाकात करते हुए उनके तेजी से स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा, "हम प्रार्थना करते हैं कि वे जल्द ठीक हों और उनका आंदोलन सफल हो। लद्दाख के लोगों को शांति से रहने का अधिकार मिले।"