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सपा में फिर उभरी अंदरूनी खींचतान: सम्मेलन में सांसद पहुंची लेकिन गायब थे चारों विधायक, गर्माई सियासत; उठे सवाल

Published जुलाई 19, 2026 · Updated जुलाई 19, 2026 · By David Taylor

समाजवादी पार्टी में विभाजन के नए संकेत: चार विधायकों के ब्राह्मण सम्मेलन से अनुपस्थिति ने तैर उठी सियासी लहर

पार्टी नेतृत्व के कार्यक्रम बारे जानकारी देने के बाद भी विधायक नहीं पहुंचे

सप म फ र उभर अ दर - अमरोहा में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में चार विधायकों की गैरहाजिरी ने नए राजनीतिक खिंचतान के बारे में चर्चा शुरू कर दी है। इस घटना से लगता है कि पार्टी के भीतर बाहरी संघर्ष और अंतर्निहित विवाद फिर से उभर रहे हैं।

जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को सम्मेलन के बारे में अप्रत्यक्ष रूप से जानकारी देने की कोशिश की गई थी। इसके बारे में जानकारी नहीं है कि कमाल अख्तर अमरोहा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम के कारण शामिल नहीं हो पाए। वहीं, देहात विधायक नासिर कुरैशी के कहने वाले अनुपस्थिति के कारण अस्पष्टता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से लखनऊ में हैं और कार्यक्रम की जानकारी उन्हें लगभग अज्ञात थी। इसके बारे में जानकारी नहीं है कि कमाल अख्तर अमरोहा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम के कारण शामिल नहीं हो पाए।

ठाकुरद्वारा विधायक नवाब जान के बारे में भी जानकारी कम पाई गई। उन्होंने बताया कि जानकारी थी, लेकिन तारीख के बारे में अस्पष्टता रही। उनका दावा है कि टीम को कार्यक्रम में जाने के लिए कहा गया था, जबकि वह किसी काम से ढकिया आए हुए थे।

बिलारी विधायक फहीम इरफान की गैरहाजिरी के बारे में जिलाध्यक्ष भी अस्पष्ट रहे। उन्होंने बताया कि सूचना भेजी गई थी, लेकिन उनके आने के कारण के बारे में जानकारी नहीं है।

इस घटना से पहले भी समाजवादी पार्टी के भीतर विभाजन के कई मौके देखे गए हैं। उदाहरण के लिए, रामगंगा विहार के क्लिफटन बैंक्वेट हॉल में हुए पीडीए सम्मेलन में नसीमुद्दीन सिद्दीकी नाराज होकर बिना भोजन किए लौट गए थे। उस दौरान कार्यकर्ताओं ने शहर विधानसभा से सलीम अख्तर को टिकट देने की मांग उठाकर नेतृत्व को असहज कर दिया था।

वहीं, ताजपुर में आयोजित पीडीए सम्मेलन में सांसद रुचि वीरा के अनुपस्थिति और पोस्टरों से उनका फोटो गायब रहने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद कमाल अख्तर ने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा शुरू हो गई।

अब इस घटना के बारे में राजनीतिक जानकारों का विश्लेषण है कि अगर नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों के बीच यही दूरी बनी रहती है, तो आगामी चुनावी रणनीति पर इसका असर हो सकता है। ब्राह्मण सम्मेलन के बाद भी जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति विपक्ष के लिए अहम बनी हुई है।