राम मंदिर चढ़ावा विवाद: छह दिन जांच के बाद SIT लखनऊ रवाना, सीएम को सौंपेगी रिपोर्ट! जल्द खुलेंगे बंद राज
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT लखनऊ के लिए रवाना, रिपोर्ट जल्द सीएम को पहुंचेगी
र म म द र चढ व - राम मंदिर चढ़ावा विवाद के मामले में अयोध्या में छह दिन चली जांच के बाद संसदीय जांच टीम (SIT) लखनऊ के लिए रवाना हो गई है। जांच में महंत शशिकांत दास के पक्ष की निर्माण कार्य और वित्तीय गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई। टीम ने रवाना होने से पहले शंका जताए गए व्यक्तियों से बातचीत की और विवाद के मुख्य बिंदुओं का खंडन करने की कोशिश की।
जांच के उद्देश्य और चर्चा
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बारे में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं जारी हैं, जिसमें संसदीय जांच टीम की भूमिका को अहम रूप से देखा गया है। बताया गया है कि टीम ने निर्माण कार्य में संलग्न तीन बैंकों के कर्मचारियों और गणना कर्मियों के साथ बातचीत की। इस विवाद के पीछे राजनीतिक आंदोलन और सामाजिक विवाद के अंतर्भूत रहने की संभावना है।
महंत शशिकांत दास ने अपने पक्ष को सामने रखा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने नवनिर्मित भवन को ट्रस्ट कार्यालय के संचालन के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया था। अनुज झा जिलाधिकारी और चंपत राय ट्रस्ट महासचिव के अनुरोध पर भवन को ट्रस्ट को सौंप दिया गया, लेकिन कमीशन के बारे में कोई शुल्क नहीं लिया गया।
कार्यालय स्थानांतरण और नए आरोप
राम मंदिर के चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट ने कैंप कार्यालय को रामनिवास के पास स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके बाद भवन के उपयोग को रोक दिया गया। बताया गया है कि महंत शशिकांत दास दीनानाथ वर्मा को जानते नहीं हैं और उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई। वर्मा ने राम मंदिर निर्माण कार्य में एल्युमिनियम कार्यों के ठेकेदार से 40% कमीशन की मांग करने के आरोप को जारी किया है।
राम मंदिर के चढ़ावा विवाद के दौरान आरोपों में लगातार नए विवाद शामिल हो रहे हैं। ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों पर जबरदस्त आरोप लगाए गए हैं। वर्मा के अनुसार, कार्यालय के निर्माण के दौरान कमीशन खोरी के आरोप लगाए गए, जो कि राम मंदिर परिसर के वित्तीय लेखाकर्म और निर्माण कार्य में व्याप्त गंभीरता को दर्शाते हैं।
इस विवाद की जांच में दीनानाथ वर्मा के कथित आरोप को तलाश करने की कोशिश की गई। वर्मा ने बताया कि कार्य का बिल भी �