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यूपी: ‘2029 में एक साथ होंगे लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव, बदले जा सकते हैं कानून’, पीपी चौधरी ने की घोषणा

Published जुलाई 15, 2026 · Updated जुलाई 15, 2026 · By Daniel Davis

यूपी: 2029 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे, कानून बदले जा सकते हैं

य प - यूपी के संभावित राजनीतिक भविष्य के बारे में बात करते हुए, भाजपा के सांसद एवं जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने घोषणा की कि देश के सभी राज्यों में 2029 में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ आयोजित किए जाएंगे। इसके बारे में चौधरी ने कहा कि अब चुनावों के आयोजन में नए कानून बदले जा सकते हैं, जो लोकतंत्र की असली हितधारकों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

चुनाव एक साथ होंगे, लोकतंत्र के लिए उपयोगी होगा

चौधरी ने लखनऊ में तीन दिन के दौरे के दौरान बुधवार को होटल ताज में अमर उजाला के साथ खास बातचीत के दौरान इस घोषणा को बयानबाजी के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आम जनता के द्वारा एक देश-एक चुनाव की समर्थन आवाज बढ़ रही है, जो आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय विचारधारा के अंतर्गत संगठित हो रही है। यूपी के नागरिकों के बीच इस अवधारणा की समर्थन रेखा स्पष्ट दिखाई दे रही है।

“हम देश में जहां भी जा रहे हैं, यूपी के नागरिक एक देश-एक चुनाव के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं। लोकतंत्र की असली हितधारक जनता ही है, जिसे अधिक विश्वसनीय तैयारी देने के लिए अब एक देश-एक चुनाव की योजना कानून बदले जा सकते हैं।”

इस घोषणा के साथ, चौधरी ने चुनाव के आयोजन में लोकतंत्र के विकास की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने दावा किया कि 1952 से 1967 तक चुनाव एक साथ होते रहे, जब ईवीएम जैसी आधुनिक व्यवस्था भी नहीं थी। आज भारत की आधुनिक व्यवस्था बहुत आगे पहुंच चुकी है, जिसके आगे चुनाव के साथ-साथ अन्य सांसदों व राज्य सभा के विचारों के संगठन में सुगमता आएगी।

विपक्ष का विरोध और राजनीतिक बोध

चौधरी ने कहा कि विपक्ष एक देश-एक चुनाव की अवधारणा को संघीय ढांचे के खिलाफ बता रहे हैं, लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि इससे कोई भी राष्ट्रीय संगठन गंभीर रूप से प्रभावित नहीं होगा। विपक्ष के विचार के बारे में बात करते हुए, चौधरी ने बताया कि अपने राजनीतिक एजेंडे के कारण विपक्षी दल अब भी एक देश-एक चुनाव के विरोध में बोल रहे हैं।

लखनऊ में उनसे मिले सपा, कांग्रेस आदि प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने अपने विचार में एकता दिखाई दे रहे हैं। यह संकेत देता है कि आगे चलकर राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए कई राजनीतिक दल एक देश-एक चुनाव की योजना का समर्थन कर सकते हैं