चार हत्यारों को फांसी: कोर्ट ने किया सीएम की सुपारी लेने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला का जिक्र; ददुआ पर कही ये बात
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चार हत्यारों को फांसी: सीएम की सुपारी लेने वाले का जिक्र
Indianewslive247.com – च र हत य र क फ – भभीसा गांव में 2014 की गर्मियों में हुई खूनी हत्याकांड के चार हत्यारों को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में विपुल खूनी और उसके साथियों ने किसान पवन की हत्या कर दी थी। नामजदगी को लेकर आशु और विपुल की मां राजेश के बीच रंजिश पैदा हुई थी, जिसके बाद 14 जुलाई 2014 को फायरिंग की गई। कुल बीस राउंड चलाए गए जिनमें से दो गोली पवन को लगीं और वह मौत के घाट उतर गया।
पुलिस जांच और दोषियों की पहचान
पुलिस ने इस मामले में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया। पिछले महीने 25 जुलाई को विपुल खूनी बागपत में हुई मुठभेड़ में मारा गया। आरोपी अमित की पत्रावली एक मार्च 2024 को पृथक कर दी गई। छह अगस्त को अदालत ने भभीसा के राहुल उर्फ बोसी, कांजरहेड़ी गांव के हरेंद्र कुमार, पीरखेड़ा के रामवीर और बागपत के बड़ौत निवासी राजीव उर्फ छोटू पर दोष सिद्ध किया। बृहस्पतिवार को चारों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
राहुल उर्फ बोसी पर 1.70 लाख और अन्य प्रत्येक पर 1.60 लाख का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की आधी धनराशि पवन की पत्नी सोहनवीरी को क्षतिपूर्ति के तौर पर दी जाएगी। अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए।
संगठित अपराध का इतिहास
सुशील मूंछ की पश्चिम यूपी के अपराध में तूती बोलती थी। गैंग आईएस 199 पंजीकृत है। संगठित अपराध की शुरुआत मूंछ ने की, उसके गैंग में 450 से अधिक सदस्य हैं।
अदालत ने फैसले में यह भी लिखा कि 50 हजार रुपये का इनामी विपुल खूनी इसी गैंग का शॉर्प शूटर था। वीर बहादुर ने इसलिए बनाया गैंगस्टर एक्ट। अदालत ने लिखा कि प्रदेश में 1970-80 के दशक में अपराधीकरण जातिगत आधार पर हो रहा था। ठाकुर जाति के अपराधियों का हित व संरक्षण वीरेंद्र प्रताप शाही कर रहे थे, जबकि ब्राह्मण जाति के अपराधियों का संरक्षण हरि शंकर तिवारी कर रहे थे।
दोनों गैंगस्टर से राजनेता बने थे। शाही की हत्या 1997 में माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने की थी। गोरखपुर के रहने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह अपराध से परेशान थे, इसी वजह से संगठित अपराध को खत्म करने के लिए गैंगस्टर एक्ट 1986 बनाया गया था।
कल्याण सिंह, एसटीएफ और ददुआ की कहानी
अदालत ने लिखा कि माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की छह करोड़ की सुपारी ली थी। संगठित अपराध को खत्म करने के लिए चार मई 1998 को कल्याण सिंह ने एसटीएफ छह महीने के लिए बनाई थी। एसटीएफ ने 22 सितंबर 1998 को गाजियाबाद में शुक्ला को मारकर सार्थकता साबित की।
22 जुलाई 2007 को चित्रकूट में शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ को मार गिराया। गैंग लीडर अंबिका पटेल ठोकिया ने एसटीएफ के 16 जवानों पर हमला किया, जिनमें छह शहीद हो गए थे। अगस्त 2008 में ठोकिया मारा गया। चित्रकूट में अदालत ने 10 अक्तूबर 2025 को इस वाद का निस्तारण किया था।
न्याय की मशाल कभी बुझती नहीं
अदालत ने 73 पेज के फैसले में लिखा कि जब भय बाजार बन जाए, हिंसा व्यवसाय बन जाए और मानव जीवन केवल लाभ-हानि का साधन बन जाए, तब न्यायालय का मौन रहना भी अन्याय का सहभागी बन जाता है। इसलिए विधि का हाथ केवल अपराधी तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि समाज को यह विश्वास दिलाने के लिए भी उठता है कि न्याय की मशाल कभी बुझती नहीं। समय लग सकता है, परंतु कानून की पकड़ से कोई भी अपराधी अंतत बच नहीं सकता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चार हत्यारों को कब फांसी की सजा सुनाई गई? बृहस्पतिवार को अदालत ने चार हत्यारों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
श्रीप्रकाश शुक्ला ने कितनी सुपारी ली थी? माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की छह करोड़ की सुपारी ली थी।
एसटीएफ कब बनाई गई थी? चार मई 1998 को कल्याण सिंह ने एसटीएफ छह महीने के लिए बनाई थी।
ददुआ को कब मार गिराया गया? 22 जुलाई 2007 को चित्रकूट में शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ को मार गिराया।
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