गजब कारनामा: कोटा में भगवान हनुमान बने मतदाता, वोटर लिस्ट में लगी फोटो; अब जगदीश की तलाश में जुटा प्रशासन
कोटा: वोटर लिस्ट में हनुमान जी की फोटो, प्रशासन जगदीश की तलाश में
Indianewslive247.com – गजब क रन म - गजब कारनामा कोटा के वार्ड 29 में सामने आया है — नगर निगम चुनाव की तैयारी के बीच वोटर लिस्ट में एक मतदाता की जगह भगवान हनुमान की तस्वीर छपी मिली है। यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मतदाता-पहचान प्रणाली की मजबूती पर सीधा सवाल खड़ा करती है। प्रशासन अब उस व्यक्ति की खोज में जुटा है, जिसका नाम सूची में दर्ज है पर जमीन पर कोई उसे पहचान नहीं पा रहा।
सूची में दर्ज तथ्य और असंगति
वार्ड 29 की वोटर लिस्ट, भाग संख्या 12, क्रमांक 1294 पर एक प्रविष्टि मौजूद है: जगदीश, पुत्र रामचंद्र, आयु 35 वर्ष, पता प्रेम नगर सेकंड, कंसुआ इलाका। प्रारूप के सभी फ़ील्ड — नाम, पिता का नाम, आयु, पता, क्रमांक — पूरी तरह भरे हुए हैं। परंतु फोटो कॉलम में किसी व्यक्ति की पहचान-तस्वीर की बजाय भगवान हनुमान की प्रति अंकित है। यानी पहचान-सत्यापन की सबसे अहम कड़ी पूरी तरह अलग सामग्री से भर गई है।
बीएलओ राजेश गुप्ता का कहना है कि इस वार्ड की सूची में पहले से मौजूद त्रुटियाँ सुधर चुकी थीं और उन्होंने स्वयं यह नाम जोड़ा नहीं। उनका अनुमान है कि सम-इंटरफ़ेस रिपोर्टिंग (SIR) के बाद कुछ फॉर्म सीधे कार्यालय पहुँच गए और उसी चरण में यह प्रविष्टि जुड़ गई। गुप्ता ने उच्चाधिकारियों को शिकायत दर्ज करवा दी है और जांच का आदेश दिया है।
जमीनी खोज और राजनीतिक प्रतिक्रिया
बीएलओ की टीम ने दस दिन से अधिक समय तक प्रेम नगर और कंसुआ इलाके में घूमकर जगदीश की खोज की। न कोई पड़ोसी उस नाम से जुड़ा व्यक्ति पहचान पाया, न कोई परिवार उस पते पर उस नाम से मिला। सूची या संबंधित फॉर्म में मोबाइल नंबर भी दर्ज नहीं है, जिससे संपर्क स्थापित करने का विकल्प भी बंद है। रिटर्निंग ऑफिसर को पूरी स्थिति की जानकारी दे दी गई है ताकि चुनाव दिवस पर कोई बाधा न उभरे।
वार्ड 29 से भारतीय जनता पार्टी की ओर नगर पालिका चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी बद्री आर्य ने कार्यकर्ताओं के ज़रिए इस घटना की जानकारी पाई। उनका मानना है कि सूची में दर्ज व्यक्ति संभवतः वास्तविक मतदाता हो सकता है, परंतु फोटो कॉलम में गलती से भगवान की प्रति चिपका दी गई।
"संभावना है कि यह यहां का मतदाता हो सकता है, लेकिन गलती से हनुमान जी की फोटो लग गई है।" — बद्री आर्य, प्रत्याशी, वार्ड 29
पुनरावृत्ति और प्रणालीगत सवाल
यह पहली बार नहीं है जब कोटा की वोटर लिस्ट में ऐसी असंगति उभरी है। वर्ष 2018 में भी एक मतदाता के नाम के सामने फोटो कॉलम में अलमारी की तस्वीर छपी मिली थी, जिसे प्रशासन ने जांच के बाद सुधारा। दो बार एक ही शहर में इसी प्रकृति की घटनाएँ होने का अर्थ है कि सूची-निर्माण प्रक्रिया में कहीं न कहीं प्रणालीगत कमज़ोरी बनी हुई है।
वोटर लिस्ट की तैयारी में बीएलओ की भूमिका जमीनी स्तर पर नाम-पता-फोटो के सत्यापन तक सीमित होती है। इसके बाद डेटा SIR या समान प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय स्तर पर अपलोड होता है, जहाँ क्रॉस-चेकिंग और डेटा-मैनिपुलेशन होता है। यदि किसी चरण में फोटो-फ़ील्ड में गलत इमेज अपलोड हो जाए या भौतिक फॉर्म कार्यालय पहुँचकर प्रोसेस हो जाए, तो अंतिम सूची में असंगति बन सकती है। गजब कारनामा यहीं पर खत्म नहीं होता — असली सवाल यह है कि चुनाव दिवस पर यदि वह व्यक्ति पोलिंग बूथ पर पहुँचता है, तो फोटो-मैचिंग की कमी से उसकी पहचान में बाधा उत्पन्न होगी या नहीं। प्रशासन को अब न केवल जगदीश की तलाश करनी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि इस त्रुटि का मतदाता-अधिकारों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या जगदीश वास्तव में मतदाता है? अभी तक इसका पुष्टि या अस्वीकार नहीं हो पाया है। बीएलओ की दस दिन से अधिक की खोज में कोई परिचय नहीं मिला और मोबाइल नंबर भी सूची में दर्ज नहीं है। जांच जारी है।
प्रश्न: क्या इस घटना से चुनाव रद्द या टाला जा सकता है? रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित कर दिया गया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि चुनाव दिवस पर उस मतदाता की पहचान-सत्यापन प्रक्रिया में बाधा न पड़े। सूची में एक नाम की असंगति से पूरे चुनाव की वैधता प्रभावित नहीं होती।
प्रश्न: यह घटना पहले भी
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