एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: विशाल चतुर्वेदी ने खोले ‘हनुमान अंश’ के कई राज, नई पीढ़ी और अध्यात्म पर जानिए क्या बोले
एक सक ल स व इ: ‘हनुमान अंश’ के जरिए नई पीढ़ी तक अध्यात्म का संदेश
Indianewslive247.com – एक सक ल स व इ टरव - फिल्म ‘हनुमान अंश’ के लेखक-निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने एक सक ल स व इ बातचीत में फिल्म की सफलता, युवाओं की प्रतिक्रिया और निर्माण के दौरान हुए अनुभव साझा किए। उनका कहना है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषय पर बनी इस फिल्म को अलग-अलग आयु वर्गों के दर्शकों का स्नेह मिला है। फिल्म की लागत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि इसकी कमाई 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।
डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, फिल्म की उपलब्धि केवल बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है। स्कूलों और कॉलेजों के युवा इसके किरदारों, गीतों और भावनात्मक संदेश से जुड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म के गीतों पर बनने वाली रील्स को भी वे दर्शकों के इसी जुड़ाव का संकेत मानते हैं।
युवाओं में आध्यात्मिक विषयों को लेकर उत्साह
प्रचार के दौरान शिक्षण संस्थानों में पहुंच रहे निर्देशक ने बताया कि युवाओं की प्रतिक्रिया ने उन्हें उत्साहित किया है। उनके मुताबिक नई पीढ़ी सिर्फ हल्के-फुल्के मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदना, आस्था और जीवन-मूल्यों से जुड़ी कहानियों को भी समझना चाहती है।
“नई पीढ़ी बहुत प्रतिभाशाली और समझदार है। स्कूलों और कॉलेजों में फिल्म तथा उसके पात्रों के लिए युवाओं का अलग उत्साह दिखाई देता है। मेरे लिए यह बहुत अच्छा बदलाव है।”
एक सक ल स व इ चर्चा में उन्होंने कहा कि ‘हनुमान अंश’ को स्वस्थ मनोरंजन और अध्यात्म के बीच एक सेतु के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि युवा ऐसी कहानियों को अपनाते हैं, तो भविष्य में इसी तरह के विषयों पर और काम करने की संभावना बढ़ेगी।
शूटिंग की चुनौतियां और हनुमान चालीसा का पाठ
डॉ. चतुर्वेदी ने फिल्मांकन के शुरुआती दिनों की कठिनाइयों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, शूटिंग के पहले दिन महाराज जी की भूमिका निभाने वाले कलाकार अस्वस्थ हो गए। अगले दिन नए कलाकार सौभिनव के साथ काम शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ व्यवधानों के कारण शूटिंग आगे नहीं बढ़ सकी।
निर्देशक ने बताया कि इसके बाद पूरी टीम ने साथ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। उनका अनुभव है कि इस पाठ से टीम में नई ऊर्जा, एकाग्रता और विश्वास का भाव आया। बाद में भी सेट पर किसी परेशानी के समय टीम ने इसी तरह पाठ किया।
“जब लगातार बाधाएं सामने आईं, तो मैंने सब कुछ हनुमान जी पर छोड़ दिया। टीम ने मिलकर हनुमान चालीसा पढ़ी और पाठ पूरा होने तक नई ऊर्जा महसूस होने लगी।”
फिल्म में संपूर्ण हनुमान चालीसा शामिल करने को डॉ. चतुर्वेदी अपनी आस्था से जोड़ते हैं। बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति लोगों की श्रद्धा और उनके जीवन से जुड़े अनुभवों को भी वे इस फिल्म की प्रेरणा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
सौभिनव ने बताया भूमिका को निजी अनुभव
बाबा नीब करौरी महाराज की भूमिका निभाने वाले सौभिनव शुरुआत में डॉ. विशाल चतुर्वेदी के सहायक के रूप में फिल्म से जुड़े थे। बाद में उन्हें महाराज जी का किरदार निभाने का अवसर मिला। सौभिनव इसे हनुमान जी की कृपा और जीवन की अप्रत्याशित यात्रा के रूप में देखते हैं।
“मेरे लिए यह चमत्कार जैसा है, इसे लीला भी कह सकते हैं। जब कुछ समझ न आए, तो आंखें बंद करके हनुमान जी की ओर हाथ बढ़ा देना चाहिए; आगे का रास्ता वही दिखाते हैं।”
सौभिनव के मुताबिक, उन्होंने करीब आठ वर्ष पहले मांसाहार छोड़ दिया था और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया था। वे इसे किसी भूमिका की तैयारी नहीं, बल्कि अपने जीवन के सात्त्विक बदलाव का हिस्सा मानते हैं। दर्शकों से मिलने वाले स्नेह को वे स्वयं के बजाय बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति श्रद्धा का सम्मान बताते हैं।
‘पार्वती’ समेत पांच गीतों ने बढ़ाई फिल्म की पहचान
फिल्म के संगीत ने भी दर्शकों के बीच अपनी अलग जगह बनाई है। गायक-गीतकार सत्या तिवारी ने बताया कि ‘पार्वती’ गीत की लोकप्रियता से उन्हें व्यापक पहचान मिली। उन्होंने फिल्म के लिए पांच गीत लिखे और गाए हैं, जबकि संगीत निर्माण में अन्य कंपोजर भी शामिल रहे।
सत्या तिवारी ने गीतों की सफलता का श्रेय डॉ. विशाल चतुर्वेदी को दिया। उन्होंने कहा कि प्रचार के दौरान लोगों और बच्चों को उनके गीत साथ गाते देखना विशेष अनुभव होता है। एक सक ल स व इ बातचीत में फिल्म से जुड़े कलाकारों ने संगीत को भी दर्शकों तक फिल्म का भाव पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
‘हनुमान अंश’ में बाबा नीब करौरी महाराज की भूमिका किसने निभाई है?
फिल्म में बाबा नीब करौरी महाराज की भूमिका सौभिनव ने निभाई है। वह शुरुआत में फिल्म से सहायक के तौर पर जुड़े थे।
फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी युवाओं की प्रतिक्रिया को क्यों अहम मानते हैं?
डॉ. विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों का फिल्म, इसके पात्रों और गीतों से जुड़ना यह दिखाता है कि नई पीढ़ी आध्यात्मिक एवं मूल्य-आधारित विषयों में भी रुचि रखती है।
फिल्म के निर्माण के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ क्यों किया गया?
निर्देशक के अनुसार, शूटिंग के दौरान आ रही बाधाओं के बीच टीम ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। वे इसे आस्था, सकारात्मक ऊर्जा और टीम के भरोसे से जुड़ा अनुभव मानते हैं।
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