अयोध्या: चढ़ावा चोरी की वजह से भंग हो सकता है राम मंदिर ट्रस्ट, वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरह होगी व्यवस्था
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के विनाश की आशंका: चोरी के मामले में वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड जैसी व्यवस्था अपेक्षित है
अयोध्या ट्रस्ट के नियंत्रण में बदलाव
अय ध य - अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के संचालन में सबसे अधिक भूमिका चंपत राय व डॉक्टर अनिल मिश्र द्वारा निभाई गई है। अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका भी सीमित रही, जबकि संस्थापक ट्रस्टी के. परासरन, जगद्गुरु वासुदेवाचार्य, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ और युगपुरुष परमानंद अधिक आयु के कारण नियमित रूप से सक्रिय रहे नहीं। महंत दिनेंद्र दास को भी नियंत्रण से बाहर कर दिया गया। नए पदाधिकारियों के चयन के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के समान हो सकती है।
बैंक के साथ निर्भरता और खतरा
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के काम के लिए बैंक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ट्रस्ट द्वारा तैनात कर्मचारियों को गणना आदि कार्य में लगाया गया, जबकि बैंक के अधिकारियों की लापरवाही चोरी के मामले में बड़ी आशंका का कारण बन रही है। विधि विशेषज्ञ अधिवक्ता दीनबंधु चौबे के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में किया गया।
अयोध्या के ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सिफारिश और बैंक की लापरवाही के कारण ट्रस्ट के विनाश की संभावना है। इस घटना के बारे में विधिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए केंद्र सरकार को वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड जैसी व्यवस्था अपनानी पड़ सकती है।
पुलिस जांच में खुलासे और अयोध्या में चोरी के मामले
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चोरी के मामले में पुलिस की जांच में ऐसे अनुमान लगाए गए हैं जो आश्चर्य के साथ खुल रहे हैं। एक सूत्र के अनुसार, ट्रस्ट के पदाधिकारियों की नियुक्ति में कई करतूतें छिपी हो सकती हैं। इस बारे में अयोध्या के नागरिक अपने समूचे विश्वास को बरकरार रखने के लिए चिंतित हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच गैर लाभकारी कार्य के लिए बैंक के अधिकारियों की नियुक्ति अयोध्या में जांच में खतरनाक रही है। इस प्रक्रिया में अयोध्या के धर्म तथा विधि क्षेत्र में एक ग