तुकाराम मुंढे: ‘पहले खुद और बच्चों को खिलाएं’, गुटखा विज्ञापन मामले में बड़े सितारों पर भड़के अधिकारी
तुकाराम मुंढे ने गुटखा विज्ञापनों पर सितारों से पूछा सवाल
Indianewslive247.com – त क र म म ढ - महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमुख तुकाराम मुंढे ने पान मसाला और गुटखा से जुड़ी ब्रांडिंग वाले विज्ञापनों में फिल्मी सितारों की भागीदारी पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने सवाल किया कि जिन उत्पादों का प्रचार किया जा रहा है, क्या उन्हें प्रचार करने वाले लोग स्वयं और अपने बच्चों को भी इस्तेमाल करने की सलाह देंगे।
“पहले खुद और बच्चों को खिलाएं।”
तुकाराम मुंढे की यह टिप्पणी विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर चल रही नियामकीय कार्रवाई के बीच आई है। महाराष्ट्र FDA ने इस मामले में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस भेजे थे। विभाग यह जांच रहा है कि इलायची के प्रचार के जरिए प्रतिबंधित पान मसाला या तंबाकू उत्पादों की अप्रत्यक्ष ब्रांडिंग तो नहीं हो रही।
11 अगस्त 2026 को जारी हुए थे नोटिस
तीनों कलाकारों को भेजे गए नोटिस 11 अगस्त 2026 के हैं। इनमें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए 15 दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा गया था। कारण बताओ नोटिस का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं होता, बल्कि संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।
विमल ब्रांड की पहचान पान मसाला श्रेणी से भी जुड़ी रही है। महाराष्ट्र में पान मसाला उत्पादों पर प्रतिबंध के संदर्भ में FDA यह देख रहा है कि इलायची के विज्ञापन का संदेश दर्शकों तक किस रूप में पहुंच रहा है और क्या यह सरोगेट विज्ञापन की श्रेणी में आ सकता है।
कलाकारों ने जवाब दिया, दो ने मांगी व्यक्तिगत सुनवाई
तुकाराम मुंढे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने नोटिसों का जवाब दे दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन में से दो कलाकारों ने व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की है। अब FDA उनके लिखित जवाब और सुनवाई में रखे जाने वाले पक्षों की समीक्षा करेगा।
मामले में आगे की कार्रवाई विभाग के आकलन पर निर्भर करेगी। सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन कोई अतिरिक्त कदम उठाता है या नहीं। इसलिए फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
सेलिब्रिटी विज्ञापनों की जिम्मेदारी क्यों महत्वपूर्ण है
फिल्मी सितारों की लोकप्रियता विज्ञापनों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाती है। ऐसे में किसी ब्रांड से जुड़े प्रचार का असर उपभोक्ताओं, खासकर युवाओं, की धारणा पर पड़ सकता है। तुकाराम मुंढे ने इसी सामाजिक जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाया है।
विज्ञापन में केवल उत्पाद नहीं, बल्कि ब्रांड नाम, पैकेजिंग, टैगलाइन और सेलिब्रिटी की छवि भी प्रभाव पैदा करती है। यही कारण है कि नियामक एजेंसियां कई मामलों में उत्पाद के साथ उसकी सार्वजनिक ब्रांड पहचान और संभावित अप्रत्यक्ष प्रचार की भी जांच करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सरोगेट विज्ञापन क्या होता है?
जब किसी प्रतिबंधित या विवादित उत्पाद से जुड़े ब्रांड का प्रचार किसी दूसरे उत्पाद के जरिए किया जाता है, तो उसे सरोगेट विज्ञापन के रूप में देखा जा सकता है। इसकी जांच विज्ञापन के संदेश, ब्रांड पहचान और नियमों के आधार पर होती है।
क्या कारण बताओ नोटिस अंतिम कार्रवाई है?
नहीं। कारण बताओ नोटिस संबंधित व्यक्ति या संस्था से स्पष्टीकरण मांगने की प्रक्रिया है। जवाब, दस्तावेज और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद ही विभाग आगे का निर्णय लेता है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
FDA कलाकारों के जवाबों और व्यक्तिगत सुनवाई के अनुरोधों पर विचार करेगा। इसके बाद विभाग तय करेगा कि मामले में कोई आगे की कार्रवाई आवश्यक है या नहीं।
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