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आज का शब्द: जाज्वल्यमान और अज्ञेय की कविता- अन्धकार में जागने वाले

Published जून 11, 2026 · Updated जून 11, 2026 · By Charles Davis

हिंदी हैं हम की शब्द शृंखला में आज का शब्द

आज क शब द - आज के शब्द के अर्थ में शामिल हैं 'जाज्वल्यमान', जो उज्ज्वल, चमकदार या तेजस्वी को बताता है। इस शब्द के साथ अज्ञेय की कविता 'अन्धकार में जागने वाले' उपलब्ध है। कविता में रात के घुप अन्धेरे में एक आवाज उठती है, जो घुप सुने रहे अंधेरे के बीच चुप सागर की घुरघुराहट जैसी आवाज सुनाती है। इस अकेलेपन के बीच अकेला व्यक्ति अकेला रहता है, लेकिन अचानक उसे जगाने वाली आवाज के कारण उसकी अकेलापन और मामूलियत के बीच एक नई जागने की आकांक्षा उत्पन्न हो जाती है।

अन्धकार में जागने वाले कविता का अर्थ

गहरे रात के अंधेरे में अकेला व्यक्ति एक बार फिर से जग जाता है। वह जो नींद के बीच सागर की चुप घुरघुराहट सुनता है और वही अकेला होता है। कविता व्यक्ति की अकेलापन और मामूलियत को जगाने वाले घटनाओं के माध्यम से अपनी नियति की ओर ले जाती है।

‘हम नींद के बीच सागर की घुरघुराहट जैसी आवाज सुनते हुए अकेले होते हैं। न होते अकेले तो डरते, न होते मामूली तो घबराते। पर अकेलेपन और मामूलियत के बीच एक अचानक गूंज आती है, जो अपनी बुनियाद पर लेटे हुए जीवन की ओर इशारा करती है।’

आज के शब्द के माध्यम से अकेले रात के अंधेरे में बूंदाबूंदी आवाज आती है जो एक लौंगी आवाज की तरह सुनाई देती है। इस शब्द शृंखला के द्वारा एक नया सम्मान उत्पन्न होता है। इस अकेलेपन के बीच जो लोग मामूली रहते हैं, वे अपने कार्य में अकेले रहते हैं। ये कार्य राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाते हैं।

‘मैं नींद के बीच गहरा अंधेरा तोड़ता हूँ, जो रात में घिरा हुआ है। वह चुप घनी रात में बूंदा-बूंदी आवाज आती है जो मेरे अकेलेपन को संगीत की तरह बदल देती है।’

कविता में देखा जाता है कि अकेला व्यक्ति अपने कार्य के माध्यम से अकेलेपन को सामर्थ्य बना देता है। यह गौरव की लड़ी है जो हमारी बुनियाद पर खड़ी होती है। इस शब्द शृंखला के द्वारा हमें एक समाज की रचना होती है जहाँ हर व्यक्ति अपनी छोटी छोटी अकेलापन के बीच एक बड़ा सामर्थ्य उत्पन्न करता है।

अकेलेपन के बीच यह एक डोर है जो हम लोगों के घुप अंधेरे में अपने कार्य की ओर ले जाती है। इस डोर के साथ हम आपस में बंधे होते हैं और अपने कार्यों के माध्यम से एक सामूहिक संगीत बनता है। इसके अलावा हम लोगों के कार्य के माध्यम से हमारा देश रूप लेता है और हम सब वयस्क, स्वाधीन, सबल बन जाते हैं।

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