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आज का शब्द: अबोध और मैथिलीशरण गुप्त की कविता- एकांत में यशोधरा

Published जुलाई 16, 2026 · Updated जुलाई 16, 2026 · By Joseph Moore

आज का शब्द: अबोध और मैथिलीशरण गुप्त की कविता - एकांत में यशोधरा

आज क शब द - आज के शब्द के रूप में 'अबोध' का चयन आज के शब्द के शृंखला के भाग रूप में किया गया है, जो अज्ञान, मूर्खता और अनजान का प्रतिनिधित्व करता है। इस शब्द के अनुरूप, मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'एकांत में यशोधरा' अबोध के भावों को आधार बनाकर लिखी गई है। कविता के माध्यम से अबोध के संदर्भ में अनुभव के स्तर और मनोवैज्ञानिक गहराई के बारे में गहरा विश्लेषण किया गया है।

कविता के अंश

आओ हो वनवासी! अब गृह भार नहीं सह सकती देव तुम्हारी दासी!! राहुल पल कर जैसे तैसे, करने लगा प्रश्न कुछ ऐसे, मैं अबोध उत्तर दूँ कैसे? वह मेरा विश्वासी, आओ हो वनवासी! उसे बताऊँ क्या तुम आओ, मुक्ति-युक्ति मुझसे सुन जाओ-- जन्म-मूल मातृत्व मिटाओ, मिटे मरण-चौरासी! आओ हो वनवासी! सहे आज यह मान तितिक्षा, क्षमा करो मेरी यह शिक्षा; हमीं गृहस्थ जनों की भिक्षा, पालेगी सन्यासी! आओ हो वनवासी! मुझको सोती छोड़ गए हो, पीठ फेर मुँह मोड़ गए हो, तुम्हीं जोड़कर तोड़ गए हो, साधु विराग-विलासी! आओ हो वनवासी! जल में शतदल तुल्य सरसते तुम घर रहते, हम न तरसते, देखो, दो-दो मेघ बरसते मैं प्यासी की प्यासी!

अबोध का भावात्मक विश्लेषण

अबोध शब्द के माध्यम से मैथिलीशरण गुप्त ने आत्म-अनुभव के बहुत गहरे आयाम को दर्शाया है। कविता में अबोध वह स्थिति का प्रतीक है जब एक व्यक्ति अपनी आत्मा के ज्ञान से अनजान रहता है और विचार उसके पास अप्रकट रहते हैं। इस शब्द के उपयोग से गीत के रूप में एकांत में यशोधरा कविता के भाव और मनोवैज्ञानिक गहराई के बारे में विस्तारपूर्वक विचार किया जा सकता है।

कविता की विषय संरचना

एकांत में यशोधरा एक ऐसी कविता है जो अबोध के भाव के माध्यम से मनुष्य के अंतर्निहित विवेक के अभाव और बाहरी दुनिया के प्रति अपनी निराशा के साथ व्यक्त करती है। इसमें व्यक्तिगत अनुभव के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक चिंतन के संगत विषय भी समाहित हैं। इस कविता में आज के शब्द के माध्यम से भावों की आत्मा के अंतर्निहित प्रतिक्रिया का भी एक स्पष्ट चित्रण किया गया है।

कविता के अंत में आज के शब्द के आधार पर विचार का विस्तार किया गया है। अबोध के अर्थ में निहित संगत भावों को लेकर आज के शब्द के रूप में कविता के विस्तार और विषय की अभिव्यक्ति में भावों के निहित गहराई को भी समाहित किया गया है। आज के शब्द की अपनी अनूठी रचना में अबोध और आत्म-अनुभव के बारे में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।

मैथिलीशरण गुप्त की कविता के अर्थ

मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'एकांत में यशोधरा' में आज के शब्द के रूप में अबोध के आधार पर एक संगत विषय और भाव के बारे में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। इस शब्द के उपयोग से एकांत म