रूस से तेल खरीदना पड़ेगा महंगा?: भारत समेत 10 देशों पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, संशोधन बिल पेश
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रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती, भारत समेत 10 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव
Indianewslive247.com – र स स त ल खर दन – रूस से तेल खरीद करने वाले देशों पर अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश एक संशोधन में भारत, चीन समेत 10 देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इसी विधेयक में व्यापक द्वितीयक टैरिफ की शक्ति हटाने की मांग करने वाला संशोधन भी सामने आया है।
यह मामला ऐसे समय में चर्चा में है, जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के पास मध्यावधि चुनाव से पहले अवकाश पर जाने से पूर्व सीमित कार्यदिवस बचे हैं। यदि विधेयक प्रतिनिधि सभा से पारित हो जाता है, तो इसे हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा।
भारत समेत 10 देशों का नाम शामिल करने का प्रस्ताव
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर के संशोधन में रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की सूची स्पष्ट रूप से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। प्रस्तावित सूची में चीन, भारत, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज रिपब्लिक शामिल हैं।
संशोधन के तहत इन देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। मूल सीनेट विधेयक में देशों के नाम सीधे दर्ज नहीं थे, बल्कि रूस से तेल और गैस के सबसे बड़े पांच आयातकों का उल्लेख किया गया था। नए प्रस्ताव ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे को अधिक प्रत्यक्ष बना दिया है।
भारत के लिए संभावित असर केवल टैरिफ की दर से तय नहीं होगा। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन किन उत्पादों, व्यापारिक लेन-देन या कंपनियों को दायरे में लाता है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपवाद किस तरह लागू किए जाते हैं।
सीनेट से भारी बहुमत से पारित हुआ विधेयक
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ को अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने 86 के मुकाबले 11 मतों से मंजूरी दी थी। 7 अगस्त को पारित इस विधेयक में रूस के शीर्ष नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने वाले प्रावधान शामिल हैं।
विधेयक में उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी है, जिन्हें प्रतिबंधों से बचते हुए रूसी तेल पहुंचाने वाले कथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा माना जाता है। अमेरिका का कहना है कि रूसी कच्चे तेल की बिक्री से मिलने वाली आय यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्तीय समर्थन देती है।
सीनेट संस्करण राष्ट्रपति को रूस के बड़े तेल व्यापारिक साझेदारों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव रखता है। भारत और चीन का संदर्भ रूस से तेल खरीद करने वाले प्रमुख देशों के रूप में आता है, हालांकि मूल पाठ में विस्तृत नामों की सूची नहीं दी गई थी।
टैरिफ की शक्ति हटाने की मांग भी उठी
डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने विधेयक की धारा 113 को हटाने का संशोधन पेश किया है। इसी धारा के जरिए राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक द्वितीयक टैरिफ लगाने की शक्ति देने की बात कही गई है।
मीक्स के संशोधन को तीन अन्य सांसदों का समर्थन मिला है। इससे संकेत मिलता है कि रूस पर दबाव बढ़ाने को लेकर सहमति होने के बावजूद, अमेरिका में उसके आर्थिक और कूटनीतिक तरीकों पर मतभेद बने हुए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परिस्थितियों में प्रतिबंधों से अस्थायी छूट देने का प्रस्ताव भी संशोधनों में शामिल है।
एक अलग प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति किसी विदेशी व्यक्ति पर लागू प्रतिबंधों में 90 दिनों की राहत दे सकेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर इस छूट को आगे 90-90 दिनों के चरणों में बढ़ाया जा सकेगा।
यूक्रेन के लिए 15 अरब डॉलर के ऋण का प्रस्ताव
मीक्स के संशोधनों में यूक्रेन को 15 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष ऋण देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इस धनराशि का उपयोग रक्षा उपकरणों और रक्षा सेवाओं की खरीद के वित्तपोषण के लिए किया जा सकेगा।
प्रतिनिधि सभा में विधेयक और संशोधनों पर आगे की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रूस से तेल खरीद से जुड़े देशों पर टैरिफ का प्रावधान अंतिम कानून का हिस्सा बनता है या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग गया है?
नहीं। भारत समेत 10 देशों के नाम शामिल करने वाला प्रस्ताव एक संशोधन के रूप में पेश किया गया है। इसे कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की मंजूरी और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
रूस से तेल खरीद पर भारत को क्या असर पड़ सकता है?
यदि टैरिफ प्रावधान लागू होता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार और रूस से जुड़े ऊर्जा लेन-देन पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है। वास्तविक प्रभाव अमेरिकी प्रशासन के अंतिम नियमों, लागू उत्पादों और उपलब्ध छूट पर निर्भर करेगा।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
विधेयक का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने के कथित तंत्र पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का तर्क है कि रूसी ऊर्जा बिक्री से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को समर्थन देता है।
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