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क्या विजय ने की स्टालिन के टूटे जबड़े की नकल?: बॉडी शेमिंग के आरोपों पर सीएम ने दी सफाई, दिया ये जवाब

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Foto : Michael Martin - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. क्या विजय ने स्टालिन के टूटे जबड़े की नकल की?
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

क्या विजय ने स्टालिन के टूटे जबड़े की नकल की?

Indianewslive247.com – क य व जय न क स – तमिलनाडु विधानसभा में 7 सितंबर को घटित एक संक्षिप्त बॉडी-लैंग्वेज एपिसोड ने राजनीतिक तनाव को नए स्तर पर उठा दिया। टीवीके प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री विजय ने अगले दिन, यानी मंगलवार को, स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि भाषण के बीच हुई वह गति पूरी तरह बेअहम थी और किसी व्यक्ति को निशाना बनाने का प्रयोजन नहीं था। क्या विजय ने वास्तव में पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के टूटे जबड़े का संकेत दिया — यह सवाल सत्तारूढ़ डीएमके ने जोरदार तरीके से उठाया और विधानसभा के बाहर धरना तक किया।

सदन में क्या हुआ: अनुदान चर्चा से लेकर वॉकआउट तक

पुलिस विभाग की अनुदान मांग पर जवाब देते समय विजय ने डीएमके की ‘मिस्टर क्लीन’ छवि पर प्रश्नचिह्न लगाया। प्रवर्तन निदेशालय के दस्तावेजों और सरकारिया आयोग के निष्कर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने एमके स्टालिन और उनके पुत्र, पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को सीधे निशाने पर लिया। आरोप था कि राज्य-वित्तपोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम करने वाले ठेकेदारों से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर कमीशन वसूला जाता है। डीएमके विधायक团 ने तुरंत विरोध दर्ज कराया और उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में सदन से बाहर निकल गए।

इसी घटनाक्रम के बीच, मीसा के इतिहास का जिक्र करते समय विजय ने अपनी दाहिनी हथेली जबड़े पर रखी। यही इशारा बाद में व्यापक रूप से स्टालिन के टूटे जबड़े के संदर्भ के तौर पर पढ़ा गया। क्या विजय ने जानबूझकर वह गति की या यह बस एक अनियंत्रित हाथ-गति थी — इसी प्रश्न के चारों ओर पूरा विवाद घूम रहा है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: धरना, आरोप और माकपा का पक्ष

डीएमके विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के कक्ष के बाहर धरना दिया और विजय की टिप्पणियों को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। मार्शलों ने उन्हें जबरन वहां से हटाया। माकपा नेता पी. षनमुगम ने विजय पर व्यक्तिगत हमला करने का सीधा आरोप लगाया और एक्स पर लिखा:

“यह सर्वविदित ऐतिहासिक तथ्य है कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर संघर्ष हुए और दमन तथा ज्यादतियां हुईं। उस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर पुलिस ने बेरहमी से हमला किया, जिससे उनका जबड़ा टूट गया।”

षनमुगम ने आगे कहा कि किसी के शारीरिक रूप का मजाक उड़ाना निंदनीय है और मुख्यमंत्री का खुद ऐसा करना गैर-जिम्मेदाराना है। उनका तर्ज था कि विजय ने जनता-संबंधी मुद्दों के बजाय सदन का इस्तेमाल व्यक्तिगत हमले के लिए किया और विधायी मर्यादा का उल्लंघन किया।

विजय का जवाब: ‘बेअहम गति, कोई उद्देश्य नहीं’

विजय ने एक्स पर एक पोस्ट में अपनी सफाई पेश की। उनका कहना था कि सोमवार के भाषण के बीच हुई बॉडी लैंग्वेज किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं थी और इसे किसी की भावनाओं को आहत करने की कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मीसा संदर्भ पर उन्होंने कहा कि कुछ हद तक राजनीतिक शालीनता जरूरी है, लेकिन उसके बाद यह उन पर निर्भर है कि वे उसे उठाना चाहते हैं या नहीं। क्या विजय ने सच में मीसा का संदर्भ दिया या बस एक सामान्य हाथ-गति हुई — इस पर उनका पक्ष है कि वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने मीसा को देखा है, और अगर हर चीज में मीसा लाया जाता है तो उन्हें नहीं पता कि क्या करना है।

अध्यक्ष प्रभाकर का फैसला और मीसा का ऐतिहासिक संदर्भ

विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने डीएमके की मांग खारिज कर दी। उनका तर्ज था कि मुख्यमंत्री ने सदन में पहले से चर्चा किए जा चुके मुद्दों का ही जिक्र किया था, अतः उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं।

1975–1977 के आपातकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा कानून (मीसा) के तहत कई राजनेताओं को हिरासत में लिया गया था। इस अवधि में एमके स्टालिन पर पुलिस द्वारा किया गया हमला — जिसमें उनका जबड़ा टूट गया — तमिल राजनीति की स्मृति में आज भी जीवित है। क्या विजय के इशारे को इसी ऐतिहासिक जख्म के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए या यह अति-व्याख्या है, इस पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बना हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजय ने कहा कि उनकी बॉडी लैंग्वेज अनजाने में थी — क्या इसका मतलब है कि कोई गलती

Frequently Asked Questions

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