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भारत की कार्बन योजना को ब्रिटेन की मंजूरी: निर्यातकों को दोहरे टैक्स से मिलेगी राहत; फैसले से और क्या बदलेगा?

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Foto : Charles Gonzalez - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. भारत का कार्बन क्रेडिट: ब्रिटेन की CBAM मान्यता
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

भारत का कार्बन क्रेडिट: ब्रिटेन की CBAM मान्यता

Indianewslive247.com – भ रत क क र बन य – ब्रिटेन के वित्त विभाग ने सोमवार को पुष्टि की कि दिल्ली की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) अब लंदन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) की मान्यता सूची में शामिल है। इस कदम से उन भारतीय निर्यातकों की प्रभावी CBAM देनदारी घटेगी जो लोहा, स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, कांच, सिरेमिक, उर्वरक और हाइड्रोजन जैसी वस्तुएँ यूके की ओर भेजते हैं। सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह मान्यता दोहरे कर से बचाव का एक व्यावहारिक कदम है, न कि शर्त-मुक्त छूट।

मान्यता का अर्थ और शर्तें

लंदन ने हाल ही में विदेशी कार्बन कीमत-निर्धारण व्यवस्थाओं की एक सूची जारी की है, जिसमें भारत का कार्बन बाजार शामिल है। इसका तात्पर्य यह है कि यूके अब दिल्ली में चुकाई गई कार्बन कीमत को CBAM के अंतर्गत मान्य मानेगा। वित्त विभाग ने इस सूची के प्रकाशन की सूचना ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को भी भेजी है।

हालाँकि, राहत स्वतःस्वतः नहीं मिलती। ब्रिटेन के नियमों के तहत निर्यातक को प्रभावी कार्बन कीमत के भुगतान का दस्तावेज़ी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा और जाँच-सत्यापन की शर्तें पूरी करनी होंगी। राहत की रकम पूर्व-तय नहीं है; यह उस वस्तु पर लागू प्रभावी कार्बन कीमत पर निर्भर करेगी।

CCTS और CBAM: पृष्ठभूमि तथा आगे की दिशा

भारत का कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम देश की अर्थव्यवस्था से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने का बाजार-आधारित उपकरण है। इसमें उत्सर्जन की कीमत तय होती है और कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट की खरीद-बिक्री के माध्यम से कंपनियों पर कार्बन-संबंधी लागत डाली जाती है। योजना के संचालन का वित्तीय बोझ ऊर्जा दक्षता ब्यूरो उठाएगा — कंपनियों से वसूली जाने वाली फीस व शुल्क के साथ-साथ ब्यूरो के स्वयं के संसाधनों से।

लंदन ने दिसंबर 2023 में CBAM लागू करने का निर्णय लिया था; इसका कार्यान्वयन 2027 से शुरू होगा। इस तंत्र के दायरे में भारी उद्योग उत्पाद आते हैं। यदि मान्यता न मिलती, तो भारतीय निर्यात पर ब्रिटेन में अतिरिक्त कार्बन शुल्क लग सकता था।

यह मान्यता एक दिन में नहीं मिली। वाणिज्य मंत्रालय ने ब्रिटेन के साथ इस मुद्दे को लंबे समय से उठाया है और दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत लगातार चल रही थी।

यह मान्यता लंबे समय से चल रही द्विपक्षीय तकनीकी संवाद का परिणाम है, न कि एकल-दिन की घोषणा।

भारत और ब्रिटेन ने 15 जुलाई को व्यापक आर्थिक और व्यापार साझेदारी (CEPA) लागू की है। 2025-26 में वस्तु-व्यापार 25.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि 2024 में सेवा-व्यापार 35.4 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज हुआ। इस आकार के नज़रिए से CBAM-राहत का आर्थिक प्रभाव निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण है। आगे दोनों देश ऊर्जा-संबंधी समझौते और बाजार-व्यवस्था साझेदारी के तहत कार्बन बाजार नियमों पर संयुक्त कार्य जारी रखेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह मान्यता तुरंत राहत देती है? नहीं। निर्यातक को प्रभावी कार्बन कीमत के भुगतान का दस्तावेज़ी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा और ब्रिटेन की जाँच-सत्यापन शर्तें पूरी करनी होंगी। राहत की रकम वस्तु-विशेष प्रभावी कार्बन कीमत पर निर्भर करती है।

कौन-सी वस्तुएँ इस तंत्र के दायरे में आती हैं? लोहा, स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, कांच, siरेमिक, उर्वरक और हाइड्रोजन — ये सभी उच्च-उत्सर्जन श्रेणी में शामिल हैं।

CCTS का वित्त-संचालन कौन

Frequently Asked Questions

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