अधिकारी भी हैरान: कलेक्ट्रेट में डॉगी मास्क पहनकर पहुंचा युवक, बोला- हमारी नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार कर रहे
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Indianewslive247.com – अध क र भ ह र न – मध्य प्रदेश के खंडवा कलेक्ट्रेट में मंगलवार को हुई जनसुनवाई आम दिनों जैसी नहीं रही। यहां पानी, बिजली और सड़क की शिकायतें लेकर आने वाले फरियादियों के बीच एक अनोखा नजारा सबके लिए चर्चा का विषय बन गया। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मुल्लू राठौर एक युवक को कुत्ते का मास्क पहनाकर सीधे अधिकारियों की टेबल तक ले पहुंचे। इस दौरान उन्होंने खंडवा नगर निगम के अधिकारियों पर आवारा कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा दिया। डॉगी मास्क पहनाकर खोली भ्रष्टाचार की पोल मंगलवार दोपहर जनसुनवाई शुरू होते ही कलेक्ट्रेट हॉल में हलचल मच गई। कुत्ते का मास्क पहने एक फरियादी को देखकर पहले तो अधिकारी भी सकपका गए। फिर नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने मोर्चा संभाला और कहा कि नगर निगम ने शहर में आवारा कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है। कागजों पर हजारों कुत्तों का ऑपरेशन दिखाकर लाखों का भुगतान कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। राठौर का आरोप है कि बधियाकरण केंद्र की कार्यप्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा इस तरह बंदरबांट किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। इसी को उजागर करने के लिए उन्होंने प्रतीकात्मक विरोध का सहारा लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें इस अनोखे प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर लोग इसे 'क्रिएटिव विरोध' बता रहे हैं। कुछ लोग नेता प्रतिपक्ष के इस तरीके की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ इसे ड्रामा कह रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि इस प्रदर्शन ने अधिकारियों का ध्यान सबसे पहले खींचा। मौके पर मौजूद आम जनता भी इस प्रदर्शन को देखकर हैरान रह गई। कई लोग मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे। ये भी पढ़ें- Ujjain News: सड़क सुधार में उज्जैन ने बनाया रिकॉर्ड, लोकपथ एप की 327 शिकायतें निपटाकर MP में रहा नंबर-1 मैंने यह न्याय के लिए किया कुत्ते का मास्क पहने एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि मैंने यह न्याय के लिए किया। हमें बदनाम किया जा रहा है, लेकिन असली गलती नगर निगम की है। वे हमारे नाम पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, हमारी नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। हमें बदनाम किया जा रहा है। लेकिन हम बहुत वफादार जानवर हैं। उन्हें हमारी नसबंदी के नाम पर फंड मिला, लेकिन कोई नसबंदी नहीं हुई और इससे हमारी आबादी बढ़ गई। लोगों को लगता है कि हम उन्हें काटते हैं, लेकिन इसमें हमारी गलती नहीं है। पहले हमें कुछ खाने को मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। इसलिए, जाहिर है कि हम लोगों के पीछे भागेंगे। हम कलेक्टर से न्याय की मांग करते हैं। जो लोग हमारे नाम पर पैसे का गबन कर रहे हैं और हमें बदनाम कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे पता है कि मैं वायरल हो गया हूं। मुझे यकीन है कि मुझे न्याय मिलेगा…" प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे हल्के में नहीं लिया। अपर कलेक्टर काशीराम बड़ोले ने जनसुनवाई के दौरान शिकायत दर्ज की और कहा कि श्वान बधियाकरण केंद्र से जुड़ी कार्यप्रणाली और वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराई जाएगी। वहीं, एडीएम बड़ोले ने मीडिया से कहा कि जनसुनवाई में श्वान बधियाकरण को लेकर भ्रष्टाचार की शिकायत मिली है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि कोई भी अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह है पूरा मामला दरअसल, खंडवा में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम द्वारा श्मशान घाट के समीप एक बधियाकरण केंद्र का संचालन किया जाता है। इसके लिए सरकार से हर साल लाखों रुपये का बजट भी आता है। विपक्ष का आरोप है कि इस बजट का उपयोग सही तरीके से नहीं हो रहा। कागजों पर तो सैकड़ों ऑपरेशन दिखाए जा रहे हैं, लेकिन शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ रही है। अपनी बात की पुष्टि के लिए नेता प्रतिपक्ष ने आंकड़े दिखाते हुए बताया कि बीते चार वर्षों में अस्पतालों में 13 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। उनका सवाल है कि अगर बधियाकरण हो रहा है तो इतने अधिक मामले कैसे सामने आ रहे हैं।
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