किसान ने खुद को लगाई आग: तमाशबीन बने रहे अफसर, दरोगा बनाता रहा वीडियो; चहारदीवारी गिराने से रिश्वत तक की कहानी
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भूमि विवाद में किसान ने जलाया खुद को; मौके पर तहसीलदार-कानूनगो खड़े रहे, दरोगा रिकॉर्डिंग में लगा
Indianewslive247.com – क स न न ख द क – यूपी के शामली जिले में स्थित गोहरनी गांव में एक भूमि-वाद के बीच घटी घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। 22 वर्षीय किसान आदित्य ने राजस्व-पुलिस टीम के सामने ही बोतल से निकाला ज्वलनशील पदार्थ, उसे अपने शरीर पर उड़ेलकर आग लगा ली। घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया। आसपास के लोगों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ से बाद में दिल्ली रेफर किया गया।
वीडियो में दिखी अफसरों की उपस्थिति — और दरोगे की कैमरा-चाल
घटना के दौरान बने 4.50 मिनट के वीडियो ने सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया। फुटेज में आदित्य आग से घिरा दिखाई देता है, जबकि तहसीलदार राहुल सिंह, कानूनगो अमरीश शर्मा और राजस्व टीम के बाकी सदस्य हाथ बाँधे खड़े दिखते हैं। इसी समय आदर्श मंडी थाने के एक दरोगा मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करने में व्यस्त रहे। आदित्य के पिता और अन्य ग्रामीण आग बुझाने की कोशिश में जुटे नज़र आते हैं।
50 हजार रुपये की रिश्वत का आरोप
आदित्य के परिजनों का दावा है कि सदर तहसील के कानूनगो ने चहारदीवारी नहीं गिराने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की थी। जब परिवार ने यह राशि देने से इनकार किया, तब प्रशासन की टीम गिराने के लिए गाँव पहुँच गई। परिवार का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया था। आदित्य के पिता मनोज ने पुलिस में मामले की शिकायत दर्ज कराई है।
“कानूनगो साहब, मैं जा रहा हूँ। चार माह से तमाशा करवा रहे हो। आपकी हमसे क्या दुश्मनी थी। यदि मुझे कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार तुम होंगे।”
वायरल वीडियो में आदित्य यह भी कहता सुनाई देता है कि दलालों को रुपये नहीं दिए जाने पर उसे यह कदम उठाना पड़ा।
1.0256 हेक्टेयर ज़मीन पर चल रहा परिवार-वाद
गोहरनी गाँव में आदित्य के परिवार और उसके अन्य सदस्यों के बीच 1.0256 हेक्टेयर भूमि के स्वामित्व को लेकर एसडीएम न्यायालय में मुकदमा लंबित है। दोनों पक्ष ज़मीन को अपना बता रहे हैं। 30 अप्रैल 2013 को इस मामले में अंतिम आदेश पारित हुआ था। उसके बाद दूसरे पक्ष की वीरबाला ने कलक्ट्रेट में प्रार्थना-पत्र जमा कर भूमि पर कब्ज़ा दिलाने की मांग की।
कार्रवाई की टाइमलाइन
30 जून को राजस्व टीम ने भूमि की पैमाइश कर उसे चिह्नित किया, परंतु अस्थायी चहारदीवारी की वजह से कब्ज़ा नहीं दिलाया जा सका। 11 जुलाई को पुलिस बल के साथ दोबारा प्रयास किया गया। 14 अगस्त को राजस्व टीम ने मौके पर पहुँचकर आपसी सहमति से वीरबाला को भूमि पर कब्ज़ा दिलाया। उस अवसर पर चहारदीवारी का कुछ हिस्सा हटाया गया और शेष भाग 15 अगस्त तक हटाने का आश्वासन दिया गया। मंगलवार को टीम चहारदीवारी हटाने के लिए गाँव पहुँची — वही दिन जब आदित्य ने आत्महत्या का प्रयास किया।
सोमवार की बैठक और उसके बाद का क्रम
आदित्य के फूफा देशपाल सिंह के अनुसार, सोमवार को आदित्य और उसके पिता मनोज कुमार सहारनपुर में कमिश्नर से मिले थे। उसके बाद तहसील में अधिकारियों से मुलाकात कर उन्होंने बिना नोटिस दिए विपक्षियों से साज़िश कर चहारदीवारी गिराने के प्रयास का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उनकी बात सुनी ही नहीं, जिसके बाद आदित्य ने आत्मघाती कदम उठाया।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
एसडीएम सचिन राजपूत ने बताया कि मामले की जाँच कराई जा रही है। कानूनगो अमरीश शर्मा ने रिश्वत-मांग के आरोप को बेबुनियाद बताया और कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर टीम आदित्य के स्थान पर कार्रवाई के लिए गई थी। जिलाधिकारी आलोक यादव ने स्पष्ट किया कि घटना की जाँच की जाएगी।
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