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बागपत डबल मर्डर: पहले नशीली चाय पिलाई, फिर जहर के इंजेक्शन लगाए, तीन लोगों ने गड्ढे खोदकर जिंदा ही दबाया

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Foto : David Taylor - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. बागपत डबल मर्डर: नशीली चाय और जहर के इंजेक्शन से की गई हत्या
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

बागपत डबल मर्डर: नशीली चाय और जहर के इंजेक्शन से की गई हत्या

Indianewslive247.com – ब गपत डबल मर डर – बागपत डबल मर्डर की घटना पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई। इस दोहरे हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी उज्ज्वल ने पूछताछ के दौरान पुलिस को हर कड़ी बताई। एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार उज्ज्वल ने बताया कि बहन के साथ अनैतिक संबंधों का पता चलने पर अंकित प्रजापति साधु नरेशनाथ से नाराज था। सट्टे के नंबर लेने के लिए अंकित और इसरार लगातार साधु के पास आते रहते थे। अंकित दो-तीन हजार रुपये का सट्टा लगाता था, जबकि साधु नरेशनाथ लाखों रुपये का सट्टा लगाने की बात कहता था, जिसके कारण दोनों में विवाद भी हुआ था।

यह जरूरी था कि अंकित अपनी बहन को साधु के यहां जाते हुए देखता था तो वह विरोध करते हुए झगड़ा करता था। इस तरह घर में विरोध व झगड़ों के बारे में नरेशनाथ को तुरंत सूचना मिल जाती थी। उसने रोजाना झगड़ों के कारण अंकित को मारने की योजना बनाई। इसके लिए पहले ही नशीली दवाइयां और जहर के इंजेक्शन लाकर रख लिए थे, इसलिए ही 25 जुलाई को साधु नरेशनाथ ने फोन करके अंकित को बुलाया।

हत्या की घटनाक्रम

अंकित दिव्यांग होने के कारण मदद के लिए इसरार को साथ रखता था और उसे खर्च के लिए रुपये देता था, इसलिए अंकित के साथ इसरार भी आया। उस समय सिंगौली तगा गांव का एक व्यक्ति भी मंदिर में बैठा हुआ था। उस व्यक्ति के मंदिर से जाने के बाद साधु नरेशनाथ के कहने पर उज्ज्वल चाय बनाने गया। नरेशनाथ ने अपनी जेब से निकालकर नशे की 15 गोलियां दोनों की चाय में मिला दीं। नशे की गोलियों का पत्ता भी मंदिर परिसर से पुलिस को मिल गया है। इसके बाद उसने दोनों को चाय पिला दी।

चाय पीते ही अंकित और इसरार बेहोश हो गए। उनको बेहोश होते ही नरेशनाथ ने कार में रखे जहर के इंजेक्शन लगाए। पहले उनको नहर में फेंकने की योजना थी, मगर यह डर हुआ कि उनको लेकर जाते हुए कोई देख लेगा, इसलिए मंदिर परिसर में दबाने की योजना बनाई। लहचौड़ा गांव के एक व्यक्ति को फोन करके मंदिर परिसर में सफाई करने के लिए फावड़ा मंगवाया। इसके बाद मंदिर का गेट बंद कर ताला लगाकर उसके सामने साधु ने अपनी कार खड़ी कर दी और बाहर से आने वाले लोगों की निगरानी करने के लिए नाबालिग को खड़ा कर दिया।

फिर तीनों ने बारी-बारी से मिलकर गड्ढे की खोदाई शुरू कर दी। एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों ने करीब चार फीट गहरा, दस फीट लंबा और तीन फीट चौड़े गड्ढे की खोदाई की। उज्ज्वल ने पुलिस को बताया कि जिस समय अंकित और इसरार को गड्ढे में डाला गया, तब तक दोनों की सांस चल रही थी।

पुलिस की जांच और उज्ज्वल की गिरफ्तारी

नरेशनाथ हर बार पुलिस को चकमा देता रहा और अंकित की बहन व परिवार वाले भी पुलिस से उसे परिवार का सदस्य बताकर छोड़ने के लिए कह देते थे। नरेशनाथ पुलिस की पूरी गतिविधि पर नजर रखे हुए था। उसे लगा कि पुलिस सख्ती दिखाकर उसे पूरी घटना उगलवा सकती है, इसलिए वह 8 अगस्त को कार लेकर भाग गया। लहचौड़ा गांव में उसकी पत्नी एक मकान में रहती है। पुलिस ने उसका भी मोबाइल सर्विलांस पर लगा दिया। उसके पास बुधवार शाम को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया तो उज्जवल पकड़ा गया और उसने पूरी घटना का खुलासा किया।

अंकित के एटीएम से बहन ने निकाले रुपये तो मोबाइल लोकेशन में उलझी पुलिस अंकित का एटीएम घर में रखा हुआ था। उसके लापता होने के बाद उस एटीएम से उसकी बहन ने तीन बार रुपये निकाले। इससे पुलिस उलझ गई और खाते की डिटेल देखकर लगा कि अंकित खुद रुपये निकाल रहा है। जब उस एटीएम की सीसीटीवी कैमरे की फुटेज निकलवाई तो उसमें उसकी बहन रुपये निकालते हुए दिखाई दी। तब पुलिस ने दूसरी लाइन पर काम शुरू किया।

साधु का चक्मा और पुलिस की मेहनत

इसके अलावा नरेशनाथ भी पुलिस को मोबाइल लोकेशन से चकमा देता रहा। उसने अपना मोबाइल मंदिर में रख दिया और अंकित व इसरार के मोबाइल लेकर कभी खेकड़ा, कभी रटौल व बड़ागांव घूमता रहा। वह कुछ देर के लिए मोबाइल खोलता और फिर बंद कर लेता। इस तरह पुलिस को लगा कि वह खुद मौज मस्ती करने के लिए घूम रहे हैं। इस तरह पुलिस कई दिनों तक उलझी रही।

दोहरे हत्याकांड का खुलासा होने के बाद पुलिस ने श्रीगणेश मंदिर परिसर को सीज कर दिया। वहां पर पुलिस ने अंकित और इसरार को लगाए गए जहर के इंजेक्शन की खाली सिरिंज और नशीली गोलियों की तलाश की। पुलिसकर्मियों को साधु नरेशनाथ के कमरे से नशीली गोलियों का पत्ता मिल गया, जिसमें 15 गोलियां बची हुई थीं। पुलिसकर्मियों ने जहर के इंजेक्शन की खाली सिरिंज तलाशने के लिए मंदिर परिसर में लगे डस्टबिन के अलावा दीवार के पीछे पड़े कूड़े का ढेर भी खंगाला।

ग्रामीणों की गवाही और उज्ज्वल की पृष्ठभूमि

ग्रामीण सुरेंद्र कुमार ने बताया कि साधु की हरकतें ठीक नहीं थीं। गांव के लोगों ने साधु को रात में श्मशान घाट में मुर्गे की बलि देते हुए भी देखा। इसके अलावा मंदिर परिसर में जगह-जगह तंत्र क्रिया करने के निशान बने हुए है। इसको लेकर ग्रामीणों में साधु के प्रति रोष पनपने लगा था।

अविवाहित उज्ज्वल पूरनपुर नवादा गांव का रहने वाला है और अपने पिता मनोज का इकलौता बेटा है, जो मोहननगर की कंपनी में काम करता था। उज्ज्वल के परिवार में दो बहनें हैं। शादी नहीं होने को लेकर उज्ज्वल काफी परेशान रहता था।

बागपत डबल मर्डर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बागपत डबल मर्डर में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए? तीन आरोपी साधु नरेशनाथ, उज्ज्वल और एक अन्य व्यक्ति ने मिलकर हत्या की थी। उज्ज्वल की गिरफ्तारी 8 अगस्त को हुई थी।

हत्या की घटना कैसे हुई? पहले नशीली चाय पिलाई गई, फिर जहर के इंजेक्शन लगाए गए। तीनों आरोपियों ने मिलकर करीब चार फीट गहरा गड्ढा खोदकर जिंदा ही शवों को दबाया।

पुलिस ने उज्ज्वल को कैसे पकड़ा? उज्ज्वल को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था। पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया और उज्ज्वल को गिरफ्तार कर लिया।

हत्या का मुख्य कारण क्या था? अंकित की बहन के साथ साधु नरेशनाथ के अनैतिक संबंध और सट्टे के नंबरों को लेकर विवाद हत्या का मुख्य कारण था।

Frequently Asked Questions

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