PoK: पाकिस्तान ने पीओके के प्रदर्शनकारियों पर क्यों बदला अपना रुख? पहले कहा- आतंकी; अब बता रहा देशभक्त
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PoK में पाकिस्तान का रुख बदला: प्रदर्शनकारियों को देशभक्त कहा
Indianewslive247.com – PoK क्षेत्र में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पीएमएल-एन ने PoK प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना रुख बदलते हुए उन्हें आतंकी नहीं बल्कि देशभक्त बताया है। शनिवार को पीएम के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने स्पष्ट किया कि PoK में विरोध प्रदर्शन करने वालों में से 99 प्रतिशत लोग वास्तव में देशभक्त हैं। यह बयान PoK में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच दिया गया है।
PoK में आतंकियों से देशभक्तों तक की यात्रा
कुछ दिन पहले तक PoK में प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सदस्यों से जोड़ा जाता था। इसी आधार पर PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को उचित ठहराया जाता रहा था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े 99 प्रतिशत लोग हमारे देशभक्त भाई हैं।
यह बयान PoK में तथाकथित चुनाव के तीसरे चरण से पहले शनिवार को एक रैली को संबोधित करते हुए सनाउल्लाह ने दिया। इससे PoK में राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
PoK चुनाव परिणाम और भविष्य की योजनाएं
PoK में अब तक हुए चुनाव के दो चरणों में प्रतिष्ठान समर्थित पीएमएल-एन ने 25 सीटें जीत ली हैं। इसने PoK की तथाकथित विधानसभा में 45 निर्वाचित सीटों में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। चुनाव के दौरान PoK में व्यापक हिंसा और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप भी लगे हैं।
जब पीएमएल-एन की सरकार दो-तिहाई बहुमत के साथ बनेगी तो वह PoK में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठेगी। उनका पहला काम इस मुद्दे को हल करना होगा।
पीएमएल-एन का मुख्य मुकाबला PoK में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से रहा, जो केंद्र की सरकार में उसकी गठबंधन सहयोगी है। PoK के तीसरे और अंतिम चरण में सोमवार को चार सीटों पर मतदान होगा। वहीं PoK के सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं।
PoK प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
PoK में प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही जेएएसी में छात्रों, व्यापारियों, परिवहन कर्मचारियों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। PoK क्षेत्रीय सरकार ने जून में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
जेएएसी की मुख्य मांग PoK में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीटों को खत्म करना है। संगठन का आरोप है कि प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल PoK में अपनी पसंद का तथाकथित प्रधानमंत्री स्थापित करने के लिए करता है।
PoK में हिंसा और मृत्यु के आंकड़े
PoK में प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। एमनेस्टी इंटरनेशनल और पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने PoK में हिंसा की खबरों पर चिंता जताई है। दोनों संगठनों ने अधिकारियों से PoK में घटनाओं की जांच करने का आह्वान किया है।
27 जुलाई को PoK में तीन चरणों वाले चुनाव शुरू होने के बाद तनाव और बढ़ गया। जेएएसी का दावा है कि PoK में चुनाव शुरू होने के बाद से महिलाओं और बच्चों समेत 40 से अधिक लोग मारे गए हैं। संगठन का यह भी दावा है कि PoK में जून के पहले सप्ताह से अब तक 400 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने PoK में नागरिकों की किसी भी मौत से इनकार किया है। उसने जेएएसी के आंकड़ों को “बेहद बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया” बताते हुए खारिज कर दिया है।
7 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने PoK की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई थी। उसने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया था।
PoK से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PoK क्या है? PoK का पूरा नाम पाकिस्तान-कब्जा कश्मीर है। यह क्षेत्र भारत के अभिन्न हिस्से के रूप में माना जाता है लेकिन पाकिस्तान द्वारा कब्जा किया गया है।
PoK में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? PoK में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शरणार्थी सीटों को खत्म करना है ताकि प्रतिष्ठान अपनी पसंद का प्रधानमंत्री न लगा सके।
PoK में कितने लोग मारे गए? जेएएसी के अनुसार PoK में चुनाव शुरू होने के बाद से 40 से अधिक लोग मारे गए हैं जबकि जून से अब तक 400 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है।
PoK में चुनाव कब तक चलेंगे? PoK में तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं। तीसरे चरण में सोमवार को चार सीटों पर मतदान होगा।
भारत PoK के बारे में क्या कहता है? भारत का साफ कहना है कि PoK क्षेत्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं। नई दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान PoK के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है।
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