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परिसीमन के खिलाफ CM विजय की सर्वदलीय बैठक में जुटे 21 सांसद: डीएमके-AIADMK ने बनाई दूरी, किसने क्या कहा?

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Foto : Michael Martin - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. परिसीमन विरोध: 21 सांसदों की बैठक, डीएमके-एआईएडीएमके दूर
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

परिसीमन विरोध: 21 सांसदों की बैठक, डीएमके-एआईएडीएमके दूर

Indianewslive247.com – पर स मन क ख ल फ – तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को राज्य के सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन को लेकर एकजुट रणनीति बनाना था। हालांकि, राज्य की दो प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियां द्रमुक और अन्नाद्रमुक इस बैठक में शामिल नहीं हुईं। चेन्नई स्थित कलैवानर अरंगम में आयोजित इस बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के लगभग 21 सांसदों ने भाग लिया।

इनमें कांग्रेस, वीसीके, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माकपा, एमडीएमके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में उपस्थित नेताओं ने जनसंख्या के आधार पर लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का कड़ा विरोध करने पर सहमति जताई। साथ ही, इससे तमिलनाडु के राजनीतिक प्रभाव में कमी आने की संभावना को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

कांग्रेस का जोरदार बयान: तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए

बैठक के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि संसद में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व किसी भी परिस्थिति में कम नहीं होना चाहिए।

यह दलगत राजनीति से ऊपर का मुद्दा है। यह तमिलनाडु के अधिकारों और भारत की संसद में तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व से जुड़ा मुद्दा है। संसद में तमिलनाडु की भूमिका कम नहीं की जा सकती। भारत की संसद में तमिलनाडु की जगह सुरक्षित रहनी चाहिए।

चिदंबरम ने आगे बताया कि परिसीमन का कोई भी तरीका हो, चाहे वह जनसंख्या पर आधारित हो या सभी राज्यों में समान वृद्धि पर, इससे संसद में हमारी भूमिका कम होगी और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर तमिलनाडु के अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

कांग्रेस की मांग: 543 सीटें स्थिर, तमिलनाडु की 39 सीटें सुरक्षित

कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कुल संख्या 543 पर स्थिर रहनी चाहिए और तमिलनाडु के 39 सांसदों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बैठक में परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई और मांग को लेकर स्पष्ट सहमति बनी है।

हमने परिसीमन के अलग-अलग तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि लोकसभा की कुल संख्या 543 पर स्थिर रहनी चाहिए और तमिलनाडु के 39 सांसदों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

चिदंबरम ने बताया कि तमिलनाडु के दोनों सदनों के करीब 21 सांसद बैठक में शामिल हुए और सभी इस बात पर सहमत थे कि राज्य की सीटों की संख्या में बदलाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या वाली लोकसभा अप्रभावी लोकसभा होगी और इससे राज्य को लाभ नहीं होगा।

द्रमुक और अन्नाद्रमुक से कांग्रेस की अपील

चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने परिसीमन से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है। यह तमिलनाडु के साथ-साथ भारत के लिए भी नुकसानदायक होगा। इसे किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए। आज हम सभी की यही प्रतिबद्धता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दलों में बेहतर समझ बनेगी और द्रमुक और अन्नाद्रमुक स्थिति की गंभीरता को समझेंगे और कांग्रेस के साथ आएंगे।

प्रवीण चक्रवर्ती ने उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने बैठक में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के शामिल नहीं होने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों दल लंबे समय तक राज्य में सत्ता में रहे हैं। उनका मानना है कि जिस पार्टी ने छह कार्यकाल तक राज्य में शासन किया और जिस पार्टी ने पांच कार्यकाल तक राज्य में शासन किया, उसने तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया।

हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है। हम न तो कुल सीटों की संख्या में बदलाव चाहते हैं और न ही तमिलनाडु की सीटों के हिस्से में कोई बदलाव चाहते हैं। हम कोई बदलाव नहीं चाहते। इसलिए निष्पक्ष परिसीमन जैसी कोई चीज नहीं है। एकमात्र परिसीमन है-कोई परिसीमन नहीं।

डीएमके ने बनाई बैठक से दूरी: क्यों?

परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई राज्य के सांसदों की सर्वदलीय बैठक से प्रमुख विपक्षी दलों के दूर रहने के बीच द्रमुक ने अपने फैसले का बचाव किया है। द्रमुक के प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने कहा कि पार्टी ने बैठक का बहिष्कार इसलिए किया क्योंकि तमिलगा वेत्री कझगम ने परिसीमन को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

सवाल यह है कि परिसीमन पर उनका रुख क्या है? उन्होंने इसे स्पष्ट नहीं किया है। संसद के पिछले सत्र में जब विधेयक पेश किया गया था, तब हमने इसका विरोध किया था और विधेयक गिर गया था।

उन्होंने आगे बताया कि परिसीमन पर टीवीके का क्या विचार है। बैठक का एजेंडा क्या है? उन्होंने कुछ नहीं बताया है। उन्हें कहना चाहिए था कि वे इस मुद्दे पर चर्चा करने जा रहे हैं। उन्होंने हमें कुछ नहीं बताया। हम नहीं जानते कि परिसीमन को लेकर वे क्या सोचते हैं। यह जाने बिना हम बैठक में कैसे शामिल हो सकते हैं?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: तमिलनाडु की लोकसभा सीटें क्यों सुरक्षित रखने की मांग की जा रही है? उत्तर: परिसीमन के कारण जनसंख्या के आधार पर सीटों में बदलाव होने की संभावना है, जिससे तमिलनाडु का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। इसलिए कांग्रेस और अन्य दल 39 सीटों को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न: डीएमके ने बैठक का बहिष्कार क्यों किया? उत्तर: द्रमुक का मानना है कि तमिलगा वेत्री कझगम ने परिसीमन को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, इसलिए बैठक का एजेंडा अस्पष्ट था।

प्रश्न: कांग्रेस की मुख्य मांग क्या है? उत्तर: कांग्रेस की मुख्य मांग है कि लोकसभा की कुल संख्या 543 पर स्थिर रहे और तमिलनाडु की 39 सीटों में कोई बदलाव न हो।

प्रश्न: बैठक में कितने सांसद शामिल हुए? उत्तर: लोकसभा और राज्यसभा के करीब 21 सांसदों ने बैठक में भाग लिया, जिनमें कांग्रेस, वीसीके, बीसीपी, माकपा, एमडीएमके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि शामिल थे।

Frequently Asked Questions

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