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‘बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं’: युवा वकील की अभद्रता पर CJI सूर्यकांत ने तोड़ी चुप्पी, जानें और क्या कहा?

बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं: सीजेआई सूर्यकांत के संबोधन में अभद्रता और लंबित मामलों की चर्चा

बच च कई ब र ऐस कर – सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने एक समारोह में एक वर्ष बीत चुके मामलों के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में तीन बजार चार विशेष पीठों का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से संभालना है।

मुख्य न्यायाधीश की आलोचना पर जवाब

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में हुई एक घटना पर पहली बार चर्चा की, जहां एक युवा वकील पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल और दस्तावेज फेंकने का आरोप लगा गया था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हमें इन संस्थाओं की मर्यादा और सम्मान बरकरार रखना चाहिए। यह हम सभी का दायित्व है और पूरे समाज को इसे निभाना चाहिए।

उन्होंने इस घटना के बारे में कहा कि बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं। लेकिन इसके बावजूद संवैधानिक अदालत कक्ष के सम्मान को बरकरार रखना आवश्यक है, जो लोकतंत्र के आधार के रूप में अहम भूमिका निभाता है।

लंबित मामलों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था

सीजेआई ने जल्दी से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए नई रोस्टर व्यवस्था तैयार करने के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्णय से पुराने मामलों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

न्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रिया

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम नियुक्ति के लिए न्यायिक योग्यता, ईमानदारी और अनुभव के अलावा विभिन्न हाईकोर्टों के क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विविधता को भी ध्यान में रखता है।

इस प्रक्रिया में कॉलेजियम केवल व्यक्तिगत क्षमता नहीं देखता, बल्कि देश के विविधता का सही प्रतिनिधित्व भी करने के लिए विचार करता है।

इस अवसर पर आलोचना के बारे में भी बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समाज के सभी का कर्तव्य है। उन्होंने आदिश सी. अग्रवाला के शुरुआती भाषण के बारे में भी जिक्र किया, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत के न्यायाधीश बनने तक के यात्रा के विवरण दिए गए।

इसके अलावा, समारोह में हाल ही में न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना का सम्मान किया गया। इसके अतिरिक्त पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल को भी उपस्थिति में सम्मान दिया गया।

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