आज का शब्द: रन्ध्र और रवीन्द्र भ्रमर की कविता- मीत नहीं आए
आज क शब द – हिंदी शब्द शृंखला के एक अगले चरण में, आज का शब्द “रन्ध्र” है। इसका अर्थ ‘छिद्र’ होता है। इस शब्द के साथ संबद्ध रवीन्द्र भ्रमर की कविता के कुछ श्लोक भी प्रस्तुत किए गए हैं।
कविता के श्लोक
पथ अगोरते लाज लुट गई, मीत नहीं आए।
रन्ध्र रन्ध्र रिस गई बांसुरी, पोर पोर रीते। स्वर संवारते बेला रूठी गीत नहीं आए।
पँखुरियाँ मुरझीं पंकज की — मुख छवि म्लान हुई, नयन नीर रीते दुख के दिन बीत नहीं पाए।
एक लाग है, एक लगन है उन्हें रिझाने की, इतनी आयु गवांकर अब तक जीत नहीं पाए।
पथ अगोरते लाज लुट गई, मीत नहीं आए।
इस आलेख की तारीख 2026-07-09 है। अगर आप हमारे यूट्यूब चैनल के बारे में जानना चाहते हैं, तो उस पर सदस्यता ले सकते हैं।
