अय ध य: चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय ने पहली बार जवाब दिया, एसआईटी के रिपोर्ट आने के बाद हर आरोप के लिए जवाब दूंगा
संतों की भागीदारी के बिना आगे भी विवाद बरकरार रहेंगे
अय ध य में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी और महासचिव चंपत राय के इस्तीफे के बाद विभिन्न रूप से प्रतिक्रियाएं आईं। रामनगरी के संतों ने कहा कि निर्णय परिस्थितियों के अनुरूप उचित है, लेकिन ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग भी की गई। एक ओर संतों ने विश्वसनीयता की बात कही, वहीं दूसरी ओर गबन के लिए अय ध य की रक्षा करने के निर्णय की आलोचना की गई।
अय ध य के संतों ने कहा कि चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट के अंतिम रिपोर्ट आने के बाद हर आरोप का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि गोविंद देवगिरी और चंपत राय के रिपोर्ट में संतों की भागीदारी के बिना तय किए गए निर्णयों के लिए उल्लेखनीय संदेह बना रहे हैं।
एसआईटी की रिपोर्ट में गंभीर कमजोरियां छिपी रही
चढ़ावा चोरी मामले में गठित एसआईटी की रिपोर्ट में अय ध य की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 तक लगातार धनराशि की कमी के कारण भेंट गणना कक्ष में विवाद बरकरार रहे। एसआईटी ने तलाशी की प्रक्रिया में अय ध य के कर्मचारियों के गलत रवैये की चेतावनी दी।
अय ध य के कर्मचारियों की ओर से गड्डियां और खुले नोट छिपाने की 70 बार घटनाएं दर्ज की गईं। एसआईटी के रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद अय ध य के नियमित तलाशी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता उठी।
उपाय बदले लेकिन विवाद बना रहे
2024 सितंबर के बाद अय ध य में ट्रस्ट और बैंक के बीच नए नियम लागू किए गए। लेकिन फरवरी 2025 में एसओपी में तलाशी की व्यवस्था बदलकर नियमित अथवा रैंडम कर दी गई। इस बदलाव के बाद अय ध य के विवाद का वातावरण अधिक तीखा हो गया।
गणना कक्ष में आने-जाने वालों पर सख्त नियम लागू करने के बाद अय ध य में चोरी की घटनाएं बढ़ गईं। एसआईटी के रिपोर्ट में इस बारे में उल्लेख किया गया कि आरोपियों के बयानों से अय ध य के कोष में अधिक धनराशि के संकेत मिले।
चंपत राय के जवाब के बाद अय ध य में नए रूप से चर्चा शुरू
अय ध य के विवाद के बीच चंपत राय ने एसआईटी के रिपोर्ट आने के बाद हर आरोप का जवाब देने का वा�दा किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सारी जांच दल के निर्णय के बाद निष्पादन करेंगे। इससे अय ध य के संगठन के भीतर गंभ
