NGT के निर्देश: बिल्डर-उद्योग अवैध भूजल दोहन पर सख्त कार्रवाई
पर्यावरण संरक्षण याचिका में शिकायत दर्ज
ब ल डर उद य ग पर – एनजीटी ने बिल्डर और उद्योग के क्षेत्र में अवैध भूजल दोहन के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई क्षेत्रों में बिल्डर-उद्योगों के कारण भूजल स्तर निरंतर गिर रहा है। यह आवेदन पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ द्वारा दायर किया गया था, जिसमें बिल्डर उद्योग के शिकायतें और अवैध भूजल उपयोग के प्रभाव के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया।
प्रमुख अधिकरण न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद के नेतृत्व में, एनजीटी ने बिल्डर-उद्योगों के निरंतर भूजल दोहन के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-145 और 153 तथा ग्रेटर नोएडा के टेक जोन में सेक्टर-94 और 150 के क्षेत्र में जल स्तर में निरंतर कमी रही है, जिसके कारण भूजल विभाग को सख्त तौर पर कार्यवाही करनी होगी।
अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने बताया कि बिल्डर-उद्योग द्वारा अवैध भूजल दोहन के कारण जल स्तर निरंतर घट रहा है। यहां तक कि लगातार शिकायतें भेजी गईं हैं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे भूजल विभाग के कार्य के प्रभाव लगातार खतरे में हैं।
भूजल विभाग के लिए सख्त आदेश
एनजीटी ने निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश भूजल विभाग बिल्डर उद्योग द्वारा अवैध भूजल दोहन की जांच विधिसम्मत तौर पर करे। अधिकरण ने बताया कि यदि कोई ट्यूबवेल या बोरवेल अवैध रूप से संचालित पाया जाता है, तो उचित कार्रवाई की आवश्यकता है। इस आदेश के तहत भूजल विभाग को ग्रेटर नोएडा और नोएडा के क्षेत्र में विस्तारपूर्वक जांच करनी होगी।
अधिकरण ने बिल्डर उद्योग के अवैध भूजल दोहन के विरुद्ध विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही बिल्डर उद्योग द्वारा भूजल उपयोग के लिए प्राधिकरण और प्रशासनिक निगरानी के लिए आवश्यक तौर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश के तहत, बिल्डर-उद्योगों के निरंतर भूजल दोहन के प्रभाव को रोकने के लिए भूजल विभाग को उचित कदम उठाने के लिए आवश्यकता है। एनजीटी के निर्देश से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के क्षेत्र में भूजल विभाग की जांच और निगरानी में सख्ती बढ़ सकती है।
भूजल विभाग को इस आदेश के अनुसार बिल्डर-उद्योगों के अवैध भूजल दोहन की जांच करनी होगी। यह आदेश भूजल संसाधनों के बर्बाद होने के खतरे को कम करने के लिए बिल्डर उद्योग के लिए सख्त राजनीतिक उपाय हो सकता है।
