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राम मंदिर दान में डाका: ‘जैसे निर्देश, वैसा ही करते थे’, इसलिए ट्रस्ट पदाधिकारियों के आगे नतमस्तक थे बैंक अफसर

Foto : Patricia Gonzalez - indianewslive247.com

राम मंदिर दान में डाका: बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के निर्देशों के अनुसार कार्य करते थे

Indianewslive247.com – र म म द र द न – राम मंदिर के दान राशि हेरफेर के मामले में बैंक के कर्मचारियों की भूमिका चरम गंभीर मानी जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक साक्षात्कार में इसके संबंध में सवाल उठाए थे। एसआईटी को बैंक कर्मियों व पदाधिकारियों की लापरवाही और संभावित मिलीभगत के कुछ साक्ष्य मिले हैं। यहां तक कि बैंक अधिकारियों को ट्रस्ट के पदाधिकारियों के आदेशों के अनुसार कार्य करना पड़ता था, क्योंकि ट्रस्ट के अधिकारियों की पहुंच और प्रभाव का विचार बैंक कर्मचारियों में अंतर्निहित था।

एक तरह से ट्रस्ट और उनके कर्मचारियों की आवश्यकता के अनुसार कार्य किया जाता था। बैंक ने इस कार्य को एक निजी कंपनी को सौंप दिया था, जो आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की भर्ती करती थी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपने सगे-संबंधियों को भर्ती कराया था, इसलिए बैंक कर्मचारी खामोश रहे। एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक, गिनती प्रक्रिया में जितनी भूमिका ट्रस्ट के पदाधिकारियों की होती थी, उतनी ही बैंक कर्मचारियों की रहती थी।

“सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर नहीं हटाई गई, बल्कि ऑटो-डिलीट सिस्टम के तहत मिट गई। इसलिए एसआईटी के लिए चोरी के अंतर्गत कार्य करने की गड़बड़ी के सुबूत प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।” – नृपेंद्र मिश्रा

सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों का ही है, जिसके कारण कई वर्षों की फुटेज रिकवर करना असंभव है। इस वजह से अंतर्गत वर्तमान में चोरी कब से हो रही थी, इसका सटीक समय ज्ञात करना कठिन होगा। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी संदिग्ध कर्मचारियों और पदाधिकारियों के बयान दर्ज कर रही है। पांच संदिग्धों के बयान लेने के बाद भी इस गिनती प्रक्रिया में लंबे समय से हेरफेर करने की बात स्वीकार की गई है।

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अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए उनके भाषण में बयान कम रहे और धमकी अधिक थी। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि दूध का दूध नहीं, बल्कि सोने का सोना व चांदी का चांदी करें। यह बयान बैंक के कार्यक्रम तय करने में भाजपा विधायकों और पदाधिकारियों की बात पर आधारित है।

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